Sunday, 26 March 2017

किसान का पैगाम


हमें लगता है शहादत का इरादा है तेरा
वरना किसकी मजाल है जो सच को सच कह दे। 
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मैं किन के निशाने पे हूँ यह जानता हूँ मैं
थोडा बहुत उसकी नजर पहचानता हूँ मैं।
नफरत का बोझ हमसे उठाया न जायेगा
सिर्फ मोहब्बत को खुदा मानता हूँ मैं।  
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किसान का पैगाम
भले ही सूख गए हैं नहर और कुंवे सब
हमारी आँख के आंसू अभी सलामत हैं।  

पेट में रोटी और बदन पे पैरहन न सही
हमारे दिल में देश के लिए मोहब्बत है।  
हम नेता नहीं जो झूठ की सियासत करें
हमारे दिलों में सबके लिए मुरव्वत है।  
हमारी धरती माँ सबका पेट भरती है
उसकी सेवा ही हमारे लिए इबादत है।  
तुम्हे नफरत मुबारक और मुहब्बत हमको
हमारी भारत माता ही हमारी जन्नत है।
'नमन'

Saturday, 25 March 2017

तौहीन




मोहब्बत की गमींं भी क्या गमीं है 
मोहब्बत में गमों की क्या कमी है। 
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यूँ बेवजह न प्यार से हमको पुकारिए 
है प्यार अब गुनाह सियासत की नजर में। 

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वह बेवफा हुआ तो हमें यह पता चला 
इन इश्क की गलियों में वफादार नहीं हैं.
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है ऐसा क्यों कि कोई बेवजह ही याद आता है
मेरे ख्वाबों में आकर वह मुझे बेहद सताता है। 

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होश में आऊं तब तो जाम उठाऊं यारों
उससे नजरें मिलाके होश गवां बैठा हूँ। 

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शराब होठों से लगाएं तो लगाएं कैसे
तेरी मस्त निगाहों की तौहीन हो ना जाए।  

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ग़मों से प्यार करो , आंसुओं के जाम पियो 
किसी से प्यार करो, लेके उसका नाम जियो।  

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कृष्ण के देश में
साधु के भेष में
प्रेम को है लगाई
बेड़ी कंस ने.
खड्ग नफरत की
बाहर म्यानो के है
बातें अब कब्रगाहों
श्मशानों की हैं.
हम मोहब्बत करें
भी तो कैसे करें
प्रेमियों की जगह
कैदखानों में है.
नमन

Sunday, 19 March 2017

हिन्दू तालिबान

                                                     
भारतीय नेताओं और भारतीय जनमानस को अरब देशों इराक,ईरान,सीरिया, अफगानिस्तान और पाकिस्तान आदि से सबक लेना चाहिए .
अरब देशों में कच्चे तेल के उत्पादन के कारण अचानक बड़ी तेजी से आई समृद्धि से यूरोप और अमेरिका के देश घबरा गए.
अगर कच्चे तेल का उत्पादन करने वाले देश अपने आर्थिक संसाधनों का उपयोग उद्योगों को बढ़ावा देने और रोजमर्रा की आवश्यक चीजों के उत्पादन पर खर्च करते तो यूरोप और अमेरिका के देशों की कंपनियां जो लगातार अरब देशों के रोजमर्रा की जरूरत की चीजें उन्हें निर्यात कर रही थी उनमे ताला लग जाता .
इन्हें रोकने का उनके पास एक ही इलाज था कि यहां पर धार्मिक आतंकवाद को बढ़ावा दिया जाए ताकि यहां का अर्थतंत्र पूरी तरह ध्वस्त हो और अमेरिका और यूरोप में बने जरूरत के सामान और युद्ध के हथियार यह देश लगातार खरीद सके . जिससे यूरोप और अमेरिका के उद्योग धंधों और आर्थिक संस्थाओं को लाभ हो.
अगर हम जरा भी दिमाग लगाकर सोचें तो पाएंगे कि अगर यूरोप और अमेरिका की हथियार कंपनियां तमाम मुसलमान आतंकी संगठनों को हथियार बेचना बंद कर दें तो आतंकवाद अपने आप खत्म हो जाएगा .
पर क्या वे ऐसा करेंगे ?
नहीं .
क्योंकि अरब देशों के आतंकवाद से यूरोप और अमेरिका की कंपनियां लगातार आर्थिक लाभ कमा रही है.
कच्चे तेल के उत्पादन से जो अकूत धन संपत्ति अरब देशों के पास आई थी उनका उचित उपयोग अगर उन देशो ने किया होता तो दुनिया के तमाम उत्पादन, तमाम चीजें बनाने की कंपनियां आज अरब देशों में होती और वह दुनिया के सबसे बड़े निर्यातक होते.
अगर ऐसा हुआ होता तो आज यूरोप और अमेरिका की हजारों बहुराष्ट्रीय कंपनियां आर्थिक मंदी की शिकार होकर बंद हो गई होती.
अरब देश उत्पादक ना होकर उपभोक्ता बने रहें इसी में यूरोप और अमेरिका का भला था .
इस काम के लिए उन्होंने मुसलमान मुल्ला मौलवियों को आगे करके इस्लामिक आतंकवाद का भूत खड़ा किया और अरब राष्ट्रों को तबाह कर दिया.
आज भारत 125 करोड़ उपभोक्ताओं वाला देश है भारत में जिस तेजी से औद्योगिकरण हो रहा था,
जिस तेजी से हम सिर्फ उपभोक्ता ना होकर अपनी उत्पादकता बढ़ाकर , निर्यातक बनते जा रहे थे वह यूरोप और अमेरिका के देश पचा नहीं पा रहे थे.
चार दशक पहले तक जो देश अनाज और कपड़े से लेकर अपनी सारी जरूरत की चीजें यूरोप और अमेरिका से आयात कर रहा था वह इन 40 -50 वर्षों में अचानक इतना प्रगति कर गया कि उसकी कंपनियां यूरोप और अमेरिका की बहुराष्ट्रीय कंपनियों से टक्कर लेने लगी.
यह यूरोप और अमेरिका के देशों के लिए चिंता का विषय बना.
अरब देशों की तर्ज पर अमेरिका और यूरोप के देश यह चाहते हैं कि भारत में भी धार्मिक आतंकवाद का उदय हो. अस्थिरता हो, हम धर्म के नाम पर आपस में लड़े , उद्योग धंधे बंद हो और हर चीज के लिए , अपनी हर आवश्यकता के लिए हम यूरोप और अमेरिका की तरफ देखें ताकि उनका व्यापार उनका व्यवसाय जो मंदी की चपेट में आ गया है पुनर्जीवित हो सके.
कम पढ़ा लिखा होने की वजह से भारत का मुस्लिम नागरिक पहले ही मूल्ला मौलवियों और अपने धार्मिक गुरुओं के चंगुल में फंसा हुआ था. जो लगातार मैं न सिर्फ उनका आर्थिक दोहन कर रहे थे बल्कि उन्हें हिंदुओं के खिलाफ भड़का रहे थे.
1990 के दशक के बाद हिंदू कट्टरवाद नेभी भारत में अपनी जड़ें मजबूत करना शुरू कर दिया .
पश्चिम के देश इसे बड़े ध्यान से देख रहे थे.
धीरे-धीरे हिंदू धार्मिक संगठन मजबूत होते चले गए.
इन सब के पास कहां से इतना धन आया , कहां से इन्हें अपने बड़े बड़े संगठन चलाने के लिए लगातार पैसा मिला, यह एक शोध का विषय है.
मेरी चिंता यह नहीं है कि हिंदू संगठन क्यों आर्थिक रुप से समृद्ध हुए और कैसे समृद्ध हुए ?
मैं खुद ब्राह्मण हूं , हिंदू हूं, काशी और प्रयाग की, गंगा की भूमि से हूं , हिंदू संस्कृति पर , सनातन धर्म पर मेरी अगाध श्रद्धा है, वह मेरे हृदय का हिस्सा है, और इसीलिए यह मेरी चिंता है कि हिंदू धर्म तभी मजबूत हो सकेगा जब भारत मजबूत होगा .
जब भारत का आर्थिक और औद्योगिक विकास होगा. जब भारत में स्थाईत्व होगा , जब भारत में आंतरिक कलह नहीं होगा ,जब भारत सुरक्षित होगा तभी हम आर्थिक और औद्योगिक क्षेत्र में यूरोप और अमेरिका के देशों को टक्कर दे सकेंगे.
अब हमें यह तय करना होगा कि क्या स्वार्थी मुल्ला मौलवियों और कुछ दिग्भ्रमित मुसलमान युवकों
एवम् लालची और सत्ता के लिए कुछ भी करने को लालायित हिंदू पोंगा पंथियों का कहना मान कर देश को अंतर्कलह के उस अंधे कुएं में ढकेल दें जिसमें जिसमें पूरा अरब विश्व और मुसलमान देश गिर चुके हैं .
या अकल से काम लें और धर्म के इन व्यापारियों को कहे कि वे हम सब हिंदू ,मुसलमान, सिख, इसाई, पारसी भारतीयों को भाई चारे के साथ जीने दे,
ताकि हम सब मिलकर एक मजबूत हिंदुस्तान को और मजबूत हिंदुस्तान बनाएं .
उसे दुनिया का नंबर एक देश बना सकें और एक मिसाल कायम करें पूरी दुनिया के लिए.
हम दुनिया से कह सकें की आओ और देखो मनुष्यता अगर कहीं पलती बढ़ती है तो हमारे देश में.
आइए एक सशक्त हिंदुस्तान के लिए, अपने देश को दुनिया का सबसे समृद्ध और सबसे शक्तिशाली देश बनाने के लिए आपस की छोटी-छोटी लड़ाइयां बंद करें और गरीबी अशिक्षा और बेकारी के खिलाफ बड़ी लड़ाई के लिए हाथ मिलाए.

नमन 

Tuesday, 14 March 2017

कविता


जब भी 
वेदना को मिलते हैं स्वर 
गढ़ी जाती है 
एक कविता
कविता 
ह्रदय की भाषा है
आत्मा का
श्रृंगार है कविता
कविता
सिर्फ शब्दों का मायाजाल नहीं है
कविता है
मनुष्य की उत्सवधर्मिता
भविष्य की चेतना
समाज का संघर्ष
कवि
कविता करता नहीं
कविता जीता है अपने अंदर
कवि होना
अच्छा मनुष्य होना है
प्रेम, त्याग ,बलिदान
और राष्ट्रप्रेम की थाती है कविता
कविता करती है आज का मूल्यांकन
कविता देती है कल के लिए संदेश
कविता दोहराती है बीत चुके कल को
नमन

Friday, 10 March 2017


प्रश्न ?
क्या करते हो ?
मैंने कहा -मोहब्बत 
क्या कहा ! मोहब्बत 
इससे भी भला किसी का पेट भरता है
फिर खाते क्या हो?
गालियां, मैंने जवाब दिया 
उसकी आँखों में आश्चर्य था 
गालियां क्यों?
क्यों की मैं मोहब्बत करता हूँ
मैं समझा नहीं, वह अचकचाया 
फिर प्रश्न किया-
ये फटेहाल क्यों हो 
इसलिए की मैं मोहब्बत करता हूँ 
मेरा जवाब था 
उसने मेरा कालर पकड़ लिया 
स्साले ! 
ये मोहब्बत -मोहब्बत क्या लगा रखा है
इसलिए की मुझे और कुछ आता ही नहीं 
अब वह मुझे पीटते हुए हांफ रहा था 
सुबह-सुबह 
दिमाग का दही बना दिया
मोहब्बत -मोहब्बत रटे जा रहा है 
पागल है स्साला
उसने मुझे एक तरफ धकेल दिया 
और सड़क पर निकल रहे जुलुस की 
सुरक्षा में लग गया 
भीड़ नारे लगा रही थी 
..........   मुर्दाबाद !
..........   हाय- हाय !

नमन

Thursday, 2 March 2017

सच के पत्थर


उसकी आँखें कमाल करती हैं 
कैसे कैसे सवाल करती है।  
उनमें मोहब्बत ही मोहब्बत है मगर 
मेरा जीना मुहाल करती हैं।
 

---- सच के पत्थर हमें मारो लहूलुहान करो
खुशबु फरेब के फूलों की हमें कबूल नहीं। 


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उनको आईना दिखाने की जुर्रत की है 
उसने सच बोल कर सत्ता से बगावत की है . 
उसको सूली पर चढ़ा दो या बिठा लो सर पर
मुल्क से उसने मोहब्बत की हिमायत की है. 


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लोक तंत्र में
चुनाव वह झुनझुना है
जिसे पकड़ा दिया गया है
जनता के हाथ में
ताकि वह
अपनी तकलीफें भूल कर
उसे बजाने मे मस्त रहे
और माई -बाप 
मालपुवा उड़ाने में 
व्यस्त रहें। 

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तेरी नजरों के एक इशारे पर
हमने बर्बाद कर लिया खुद को.


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तमाम रात रोशनी रही ख्यालों में ,
उसकी यादों ने हमें रात भर सोने न दिया। 


नमन

Sunday, 26 February 2017

आधे-अधूरे मानव शरीर


टाटों पर बैठ कर
उन्होंने की थी पढ़ाई
टूटी फूटी मडई में
कभी आम तो कभी
बरगद या नीम की छांव में 
मुंशी जी की छड़ी से
गढ़े गए थे इंसान
पढ़ाया गया था उन्हें
देश प्रेम का पाठ ...

काठ की काली की गई
पटरियों पर
उन्होंने लिखे
अनंत शुभ्र सुंदर लेख
नाक सुडकते हुए
वे गाते रहे
सरस्वती वंदना और राष्ट्रगीत ...
नहीं दी उन्होंने
देश को गाली
नहीं रोया गरीबी का रोना
नहीं कहा अपने पितामह
और प्रपितामह को नालायक ...
गरमी की धूप में
नंगे पैर
मीलों चलकर
पहुंचे स्कूल
रचा प्रगतिशील भारत ...
हजारों
आईएएस-आईपीएस-आईआरएस
उस दिन बन गए
जिस दिन पंडित जी ने पहली बार
उन्हें बनाया था मुर्गा
अपना कान पकड़ते पकड़ते
उनकी पकड़ में कब आ गई
देश की नब्ज
खुद उन्हें भी पता न चला ...
छाती फुलाकर
देशप्रेम का गीत गाते गाते
फटे चकती लगे कपड़ों में से
प्रकट हो गए
कितने ही उत्कृष्ट वक्ता
नायक -महानायक ....
और आज
स्कूल और कॉलेज के
वातानुकूलित भवन
पैदा कर रहे हैं
उद्योगों में काम करने वाले
टेक्निकल मजदूर यानी इंजीनियर
उद्योगपतियों की जी हुजूरी करने वाले क्लर्क- एम.बी.ए.
खून चूसने वाले डॉक्टर
सफेद को काला
और काले को सफेद करने वाले
अधिवक्ता
देश को खोखला करने वाले नेता....
आज
प्रगति के शिखरों पर बैठे हैं
अकर्मण्य -अभिशप्त
आधे-अधूरे मानव शरीर
आधे-अधूरे मानव शरीर...
'नमन'

Friday, 24 February 2017

राहुल गाँधी और कांग्रेस


कांग्रेस ने २००४ से २०१४ के अपने केंद्र के शासन काल में जितना अच्छा काम किया वह कोई सरकार दोहरा नहीं सकती। कमी रही अपने काम को जनता तक न पहुचा पाने की। 
 डॉ मनमोहन सिंह हिंदी ढंग से नहीं बोल पाते , सोनिया जी हिंदी अच्छी तरह से नहीं बोल पाती। यहाँ तक तो ठीक था पर न तो लोक सभा में सदन के नेता और न तो राज्य सभा में सदन के नेता हिंदी के अच्छे वक्ता थे. 
जिस देश की ९० % जनता हिंदी समझती है वहां कांग्रेस के पास ४ मुख्य पदों पर एक भी हिंदी को प्रभावी ढंग से बोल पाने वाला नेता नहीं रहा।
१० साल लगातार यह शून्य बना रहा।
 कांग्रेस ने अच्छे प्रवक्ताओं की टीम भी नहीं बनायीं। ऐसा नहीं है की कांग्रेस के पास हिंदी के अच्छे वक्ताओं की कमी है। पर उनका सही उपयोग नहीं किया गया।  जिसका फल कांग्रेस भुगत रही है।
राजीव गाँधी की तरह राहुल गाँधी भी सत्ता के लिए लालायित नेता नहीं हैं।  राहुल चाहते तो उन १० सालों में न केवल केंद्रीय मंत्री रह सकते थे बल्कि अगर चाहते तो प्रधान मंत्री तक बन सकते थे। पर वे संगठन कामों में लगे रहे। सीखते रहे, कार्यकर्ता की तरह काम करते रहे।
हममें से अधिकतर लोग राहुल गाँधी को कांग्रेस की सारी कमजोरियों का जिम्मेदार मान लेते हैं। जो मेरी निगाह में गलत है। अगर कांग्रेस के NSUI और युवक कांग्रेस संगठनों को छोड़ दे तो बाकी जगह वे कभी किसी निर्णय में टांग अड़ाते नज़र नहीं आये।
विरोधी पार्टियां कांग्रेस के भावी सेनापति पर आक्रमण करती रही हैं, उन्हें पता है की राहुल गाँधी को अयोग्य ठहरा कर ही वे कांग्रेस को पछाड़ सकती हैं। कांग्रेस के अकर्मण्य नेता अगर अपने सेनापति का बचाव नहीं कर सकते तो किसके सहारे वे अपनी भावी जंग लड़ने की तैयारी करेंगे। राहुल गाँधी राजनीती की कुटिलता से उतने परिचित भले न हों पर उनकी सहृदयता, उनकी नीयत पर मुझे किंचित भी संदेह नहीं है।
वह एक ऐसे व्यक्ति और संगठन के खिलाफ लड़ाई लड़ रहे हैं जिन्हें झूठ बोलने , अफवाहें फ़ैलाने , भय और भ्रम की राजनीती करने में निपुणता हासिल है। जिनकी नीति , नीयत और काबिलियत हमेशा से संदेह के घेरे में रही है।
 कांग्रेस इस देश की धमनियों में रक्त की भांति व्याप्त है। उसे ऑक्सीजन देकर ही इस देश को बचाया, बढ़ाया और बनाया जा सकता है। कांग्रेस के सिपाहियों के लिए यह परीक्षा का समय है। वे अगर इस परीक्षा में पास नहीं होंगे तो स्वर्ग में बैठी स्वन्त्रता संग्राम के शहीदों की आत्मा उन्हें कभी माफ़ नहीं करेगी।
कांग्रेस के सिपाहियों के लिए सन्देश -
युद्ध कर - युद्ध कर - युद्ध कर
जीत का वर नहीं- हार का डर नहीं
काल भी हो सामने तो उससे दो दो हाथ कर।
युद्ध कर - युद्ध कर - युद्ध कर।
घना अंधकार है, देश की पुकार है
ले मशाल क्रांति की, अंधेरों पे वार कर।
जाति वाद - प्रान्त वाद और धर्म का विवाद
देश में लगे हुए , घुनों पर प्रहार कर।
युद्ध कर - युद्ध कर - युद्ध कर।

                                'नमन'

Sunday, 19 February 2017

अच्छे दिन



आर्मी कैंप पर
आतंकवादी हमला 
रक्षा मंत्री ने
फेसबुक पर उसे फेस किया
प्रधानमंत्री
ट्विटर पर गुर्राए
गृहमंत्री ने
सोशल मीडिया पर
पड़ोसी को धमकी दी
वित्त मंत्री प्रेस्टीट्यूट्स के
कानों में फुसफुसाए
कवियों ने भारतीय सेना की
शहादत के गीत गाए
भक्तों का कहना है
अच्छे दिन आए
अच्छे दिन आए .
नमन


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असहाय
प्रतिदिन देखता हूँ
लंगडी सुबह के
अभिशप्त बैसाखियों के सहारे
उजाले से 
अंधेरे की तरफ बढ़ते हुए कदम
विवशता
छटपटाहट
और पीड़ा
अपने अंतस में छिपाए
उसके कान बहरे हो रहे हैं
पीछे से आ रही आवाजों से
........आगे बढ़ो
हम तुम्हारे साथ हैं
पर साथ देने के लिए
नहीं उठता कोई कदम
नहीं बढ़ाता कोई हाथ
सिर्फ आवाजें हैं
वादे हैं
झूठे और
कभी न पूरा होने वाले वादे.
नमन

Saturday, 18 February 2017

अच्छे लोग

अच्छे लोग
अच्छी किताब की तरह
होते हैं
वे जिल्द देख कर
समझ में नहीं आते 
उन्हें बार-बार
पढ़ना पड़ता है !
'नमन'

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सत्ता के मद में 
लाल-लाल हुए चेहरे
नीले पड़ जाते हैं
आईना देख कर
अंध भक्तों को 
आंखों की जरूरत है
चक्षु विहीन भक्त
अपने अग्यान को
सत्य समझ कर
खुश हैं
जबकि
नंगा राजा
ढकेल रहा है
अंधो को
अंध कूप की तरफ....
कबीर ने ठीक ही कहा था
जाका गुरु हो आंधला चेला खरा निरंध
अंधे अंधा ठेलिया दोनों कूप पडंत.


नमन 

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कभी अकेले में आईने में निहारा करिए
आंखो आंखो में खुद ही खुद को इशारा करिए.
जब कोई पास न हो खुद को संवारा करिए,
खुद से मिलने की जहमत तो गवारा करिए. नमन


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आँखों में जिसके ख्वाब पाले थे
उसीने आँखें फेर ली हमसे। ‘नमन’


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तू दुवा कर कि मेरी याददाश्त खो जाए
तेरे बिछुड़ने गम से निजात हो जाए। ‘नमन’


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वतन पर मरने वालों को ये उनका हक नहीं देते
आज कल लोग शहीदों को इज्ज़त तक नहीं देते. 'नमन'


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कसूर मेरा था और उसने सजा खुद को दी 
इस तरह हमसे निभाई है मोहब्बत उसने. नमन