Tuesday, 18 July 2017

चाहत की कहानी


किसी के आंसू लिए
और किसी का दर्द लिया
किसी की तन्हा रातों की 
स्याही ले ली ...

किसी के कांपते होठों की 
चुप्पी पढ़कर 
किसी के टूटे हुए दिल की 
गवाही ले ली ...

किसी की सूनी आंखों में 
झांककर देखा
किसी की टूटी चूड़ियों से 
जुबानी ले ली ....

जवान दिनों से लिया
इश्क का जज्बा हमने
नाजनीनों से हमने
मोहब्बत की कहानी ले ली..

किसी को अपना बनाया
किसी को प्यार किया
खुशबू फूलों से ली
नदियों से रवानी ले ली ..

कोयल से आवाज ली
भंवरों से गुनगुनाना लिया
इस तरह हमने दुनिया का
सब खजाना लिया..

और इस तरह जब
कोई गजल कही हमने
अपनी सखियों से तब
चाहत की कहानी ले ली...
नमन

Monday, 10 July 2017

याद


याद इतना भी आना ठीक नहीं
बेवजह दिल जलाना ठीक नहीं.


अब तो बाहों में मेरी आ जाओ 
सब्र को आजमाना ठीक नहीं.


जब मोहब्बत करो तो खुलके करो

छिपके मिलना मिलाना ठीक नहीं.

और कितनी सजा दोगे हमको
रूठ कर यूं सताना ठीक नहीं.


अब यह दूरी सही नहीं जाती 

दूर रहकर रुलाना ठीक नहीं.
नमन


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उनकी आस्तीनों में सांप पलते हैं
वो खंजर छिपा के गले मिलते हैं.

ए कैसा वक़्त आ गया है की 

अपने अपनों का क़त्ल करते हैं.

कैसे भगवान् हैं वह जिनके भक्त 

फांसी लगा के मरते हैं.

लूट कर हमें  हमारे कारिंदे 

मेरी पैसों से मदद करते हैं.

रीढ़ में हड्डियाँ नहीं जिनके

वो जंगजू होने का दम भरते हैं.

जो जलते बुझते हैं जुगनुओंकी तरह 

वो सूरज होने की डींग मारते हैं . 

नमन

आधी रात के बाद


घर कच्चे थे, सड़कें कच्ची पर ईमान के पक्के थे
मेरे दादा, बाबा, काका सब जुबान के पक्के थे.
महलों में रहने वाले धनपशु ईमान के कच्चे हैं
भूख गरीबी और बीमारी इनके नाजायज बच्चे हैं.
नमन

- आधी रात के बाद -
सबसे पहले बिका था
सरकारी अधिकारियों का ईमान
वो भी बहुत सस्ता
चंद सिक्कों में
बिकता था वह...
फिर बिकी
नेताओं की आत्मा
खुले आम
सड़को, गलियों,चौराहों
संसद और विधान सभाओं में ...
फिर चुपके से
बिना शोर शराबे के बिका
समाचार
खरीद लिया उसे
धनपशुओं ने ...
अंत में
बोली लगायी गई
बची खुची
आशा की किरण
न्यायतंत्र की...
आम आदमी के जीवन में
बचा है
सिर्फ अंधेरा
आखिर रात के १२ बजे
अँधेरे में पैदा हुआ था
मेरा देश !
'नमन'

दोस्तों से दोस्ती


   दोस्तों से दोस्ती
दोस्तों से दोस्ती की बात करिए
दुश्मनों पर वक्त पर आघात करिए.
जो भी अपने हैं उनके गले लग कर
उन सभी पर प्रेम की बरसात करिए.

कह दीजे यदि किसी से प्यार करिए
बेवजह मत जब्त ए जजबात करिए.
धर्म अच्छा है उसे घर पर ही रखें
बेवजह सड़कों पर मत खुरापात करिए.
नफरतों को भुलाकर यदि हो सके तो
आज से ही प्रेम की शुरुआत करिए.
नमन

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तुमसे बेहतर कोई कहे तो सुनें
उससे बेहतर कोई कहे तो सुनें.
हर तरफ शोर है जहालत है
वॉइज अगर चुप रहे तो सुनें. नमन

Sunday, 18 June 2017

हवा महल

                                                         हवा महल 
1 जुलाई 2017 से जीएसटी पूरे देश में लागू होने जा रहा है परंतु जीएसटी को लेकर पूरे देश का मीडिया खामोश बना हुआ है .
क्या आपने जीएसटी पर न्यूज़ चेनलो में कोई बहस होते हुए देखी है ?
देश का कर ढांचा आमूलचूल ढंग से बदल रहा है लेकिन न्यूज़ चैनलो पर कोई चर्चा नहीं, कहीं कोई विचार-विमर्श नहीं. जीएसटी की अच्छाइयों और कमियों पर विस्तार में चर्चा होनी जरूरी थी और है.
देश के बहुत से हिस्सो मे जीएसटी को लेकर व्यापारी संगठनों ने बंद रखा , लोकल अखबारों ने उस पर रिपोर्टिग की है, लेकिन राष्ट्रीय परिदृश्य से यह खबर गायब है कि क्यों व्यापारी इसका विरोध कर रहे हैं.
कभी कभी सत्य और धारणा में जमीन आसमान का अंतर होता है .
इलेक्ट्रॉनिक मीडिया अपने विजुअल प्रभाव की वजह से लोगों की धारणाएं बनाने का काम करती है अक्सर यह धारणाएं सत्य से परे होती हैं.
दरअसल मीडिया में इतनी ताकत होती है कि वह किसी भी मसले को हमारे दिमाग में भर दे.
हिंदुत्व, छद्म राष्ट्रवाद, गाय और बीफ, रोहित बेमुला, JNU, कश्मीर आदि घटनाओं का उपयोग करके देश की समस्याओं से जनता का ध्यान हटाना और गैर जरूरी बातों पर चर्चा करके जनमत तैयार करना जैसे काम आज की मीडिया कर रही है.
नोटबंदी से कालाधन,नक्सलवाद और आतंकवाद का खात्मा करने की बात करने वाली मोदी सरकार नोटबंदी के 8 महीने बाद तक नोटबंदी से आए हुए रुपए नहीं गिन पाती है. हमारे लोकतंत्र का इतना बड़ा मजाक और क्या हो सकता है?
स्वछता अभियान में लगभग ढाई करोड़ शौचालय बनाने की बात मोदी सरकार कर रही है. यह औसतन 40 शौचालय प्रति गांव होता है. देश के किस गांव में 40 शौचालयों का निर्माण हुआ क्या कोई भक्त मुझे बता सकता है.
प्रतिवर्ष दो करोड़ नौकरियां देने का वादा करने वाली मोदी सरकार प्रतिवर्ष दो लाख नौकरियां देने में भी असफल रही है. परंतु मीडिया में इस बात पर कहीं कोई चर्चा नहीं होती.
विदेशी निवेश के लिए भीख मांगते हुए मोदी सौ से ज्यादा देश घूम आए हैं परंतु अब तक वास्तविक विदेशी पूंजी निवेश कितना हुआ है इसका कोई आंकड़ा रिजर्व बैंक तक के पास नहीं है.
देश की वास्तविकताओं से परे मीडिया लोगों को हिंदुत्व, लव जेहाद, बीफ, पाकिस्तान जैसी बातों में उलझाकर सरकार की मुश्किलें आसान कर रहा है.
देश की प्रगति की जो हवाई बातें मीडिया लगातार कर रहा है उससे मुझे अकबर बीरबल का एक किस्सा याद आता है .
अकबर ने बीरबल से कहा कि क्या हवाई महल बन सकता है ?
बीरबल ने कहा क्यों नहीं हुजूर, बिल्कुल बन सकता है
अकबर ने कहा तो फिर आप निर्माण शुरू करिए. बीरबल ने कहा हुजूर तैयारी के लिए 10हजार मोहरें खजाने से देने का इंतजाम करिए.
10 हजार मोहरें लेकर और कुछ महीने तैयारी के लिए छुट्टी लेकर बीरबल महल से घर चले आते हैं.
बीरबल ने दूर दूर से तोते पकड़ने वालों को बुलाया और उनसे तोते खरीद कर उन्हें तोतों को, " ईंटा लाओ-गारा लाओ, महल बनाओ" बोलने की ट्रेनिंग दी.
कुछ महीनों बाद बीरबल अपने तोतों के साथ वापस अकबर से मिलने पहुंचे. अकबर ने उनसे पूछा कि हवा महल बनाने का काम कब शुरु होगा?
तब बीरबल अपने सेवकों को तोतों को पिंजरे से आज़ाद करने की आज्ञा दी. पिंजरे से निकलकर तोते "ईंटा लाओ-गारा लाओ, महल बनाओ " रटते हुए पूरे महल में उड़ने लगे.
अकबर ने बीरबल से पूछा कि यह क्या है? बीरबल ने कहा- हवा महल बन रहा है हुजूर.
ऐसे ही मोदी जी और मीडिया मिलकर पिछले 3 साल से भारतीय जनता को हवामहल का सपना दिखाकर बेवकूफ बना रहे हैं.

Thursday, 8 June 2017

किसान और सरकार


                                  किसान और सरकार 
मोदी जी की अनुभवहीनता और एकला चलो कार्यपद्धती के दुष्परिणाम सामने आने लगे हैं.
देवेगौडा के बाद मोदी जी देश के दूसरे सबसे कम अनुभवी प्रधानमंत्री हैं. राजीव गांधी में भी प्रशासनिक अनुभव की कमी थी पर उसे नरसिम्हाराव, प्रणव मुखर्जी, कमलापति त्रिपाठी, शंकर राव चव्हाण जैसे वरिष्ठ नेता पूरा कर देते थे.
मोदी जी ने प्रधानमंत्री बनते ही लालकृष्ण आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी ,जसवंत सिंह, यशवंत सिन्हा जैसे वरिष्ठ सहयोगियो को किनारे कर दिया.
सारे निर्णय पीएमओ के अधिकारी लेते हैं और कैबिनेट में सिर्फ उस पर मुहर लगाई जाती है, जो एक गलत परंपरा है .
एक तरफ जहां कांग्रेस में यह परंपरा रही है कि हर निर्णय के लिए कई कई मीटिंग में कई कई बार चर्चा के बाद और कई मामलों में तो तो महीनों विचार-विमर्श होने के बाद निर्णय लिए जाते थे ........
वही मोदी जी के कुछ वरिष्ठ आईएएस अधिकारी मोदी जी को एक प्रेजेंटेशन देते हैं और मोदी जी उनसे प्रभावित होकर बिना अपने दूसरे वरिष्ठ सहयोगियो को विश्वास में लिए निर्णय ले लेते हैं. जिनका दुष्परिणाम अब धीरे-धीरे सामने आ रहा है.
मोदी जी ने प्रधानमंत्री बनते ही योजना आयोग का नाम बदलकर नीति आयोग कर दिया. नाम बदलने के अलावा योजना आयोग के पूरे ढांचे में कोई मूलभूत परिवर्तन नहीं किया गया.
तो फिर नाम बदलने की इतनी क्या जल्दी थी कि कुर्सी पर बैठते ही नाम बदलो मोहिम शुरू करें.
ऐसे ही नोटबंदी का निर्णय लिया गया.
नोट बंदी बुरी नहीं थी, इसके पहले की सरकारों ने भी कई कई बार नोटबंदी की.
पर जिस ढंग से उसको लागू किया गया उसने पूरे सरकार को कटघरे में खड़ा कर दिया .
अदूरदर्शिता का इससे बड़ा उदाहरण और क्या हो सकता है जिसकी वजह से 60 दिनों में लगभग 60 बार सरकार को अपने नियम बदलने पड़े. यह स्वयं दिखाता है कि मोदी जी ने आनन-फानन में यह निर्णय लिया था.
नोटबंदी से न तो नक्सलवाद बंद हुआ ना आतंकवाद. ना तो कालाधन ही पकड़ा गया.
हद तो यह है कि सरकार आज तक नहीं बता पा रही है कि नोटबंदी के बाद कितने 500 और 1000 के नोट रिजर्व बैंक में वापस आए.
नोटबंदी की वजह से न केवल करोड़ों नौकरिया गई बल्कि सरकार को लाखों करोड़ का नुकसान उठाना पड़ा वह अलग से.
बैंक की लाइन में कितने लोग मरे , कितनी शादियां रद्द हुई , कितने लोग पैसा ना दे पाने की वजह से बिना इलाज के मर गए, उनकी गणना होना अभी बाकी है.
मोदी जी की अदूरदर्शिता की वजह से कश्मीर में आतंकवाद ने पुन: सर उठा लिया है.
जिस आतंकवाद को कांग्रेस के अथक प्रयत्नों की वजह से घाटी के 4 जिलों तक सीमित कर दिया गया था वह पूरे जम्मू कश्मीर में फैल चुका है.
प्रधानमंत्री मोदी का बिन बुलाए बिरयानी और केक खाने पाकिस्तान चले जाना, विदेशों में गार्ड ऑफ ऑनर के समय राष्ट्रगीत चालू रहने पर भी मोदी जी का चल देना, कोड ऑफ कंडक्ट का पालन न करना, अपनी फोटो खिंचवाने के लिए दूसरों को बगल में कर देना जैसे अपने कार्यों के वजह से मोदी जी ने पूरे विश्व में भारतीय प्रधानमंत्री के पद की गरिमा को कम किया है.
अभी 2 साल बाकी है . मोदी जी को चाहिए कि बीजेपी के अपने सभी वरिष्ठ सहयोगी राजनाथ सिंह ,मुरली मनोहर जोशी ,लालकृष्ण आडवाणी, सुषमा स्वराज ,वेंकैया नायडू आदि के साथ बैठकर चर्चा करके सरकार के आगे के फैसले लें ताकि उन्हें सब बाद में शर्मिंदा ना होना पड़े.
साथ ही जो गलत फैसले वे ले चुके हैं उन्हें वापस लेने में कोई बुराई नहीं है , इससे उनका बड़प्पन ही होगा.
पंडित नेहरू से प्रभावित होकर मोदी जी ने खुद को चौकीदार घोषित किया, पंडित नेहरू संसद को प्रजातंत्र का मंदिर कहते थे , उनसे प्रभावित होकर मोदी जी ने संसद की सीढ़ी पर माथा टेका. पंडित नेहरू रेडियो पर भारत की जनता को संबोधित करते थे , उनसे प्रभावित होकर मोदी जी ने प्रति माह भारत की जनता से मन की बात की.
अत: मोदी जी से विनम्र अनुरोध है कि पंडित नेहरू की एक और बात का अनुसरण करें.
पंडित नेहरु संसद में और संसद से बाहर विरोधी पक्ष के नेताओं को उनकी बात कहने का न केवल पूरा मौका देते थे बल्कि उन्हें प्रोत्साहित करते थे कि वह अपनी बात करें.
निंदक नियरे राखिए आंगन कुटी छवाय
बिन पानी साबुन बिना निर्मल करे सुभाय.
आदरणीय मोदी जी अगर विपक्ष के नेताओं की बात सुनेंगे तो शायद अपनी कुछ कमियों का परिमार्जन कर पाएंगे.
आशा करता हूं कि इसके आगे प्रधानमंत्री जी सामूहिक नेतृत्व को स्थान देंगे और BJP के सारे नेता मिलकर देश को प्रगति के पथ पर आगे ले जाने में मदद करेंगे.
नमन

Wednesday, 3 May 2017

वजह


यूँ बेवजह न प्यार से हमको पुकारिए
है प्यार अब गुनाह सियासत की नजर में. 

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हमने बरसों से मोहब्बत को खुदा माना है 
अपने महबूब की बातों को दुआ माना है.
इश्क मजहब है और ग़ज़लें ही भजन है मेरा
हमने दुनिया के रिवाजों को कहाँ माना है?

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मरने की मनाही है जीने भी नहीं देते
हाथों में जाम है पर पीने भी नहीं देते.
मैं जिसको चाहता हूँ जो है मेरा मुकद्दर
कैसे उसके ख्वाब देखूं सोने भी नहीं देते. 

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तमाम रात अंधेरे से जंग जारी थी
हर जुगनू की मर मिटने की तैयारी थी.
सुबह हुई तो जुगनुओं का कहीं पता न था 
सुबह की रात में सोए हुओं से यारी थी.


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दर्द हैं , आंसू हैं, गम है और तन्हाई है 
जिंदगी हमें ए किस मोड़ पर ले आई है.
मैं तेरे गम में शामिल तो नहीं हो सकता 
तेरे ग़म में मगर आंखें मेरी भर आई है.

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--खबरें रखैल है--
खबरें रखैल हैं
सत्ताधीशों की
पूंजी पतियों की 
भ्रष्ट अफसरों की...
रोज ब रोज
काला होता है
अखबारों का
मुख (पत्र )
बदनाम
बिकी हुई खबरें
फैलाती हैं सनसनी...
संपादक
बदनाम गली के बाहर
तैनात
वह पुलिसिया है
जो मजबूरी में
दूसरी तरफ देखते रहता है
आखिर उसका भी पेट है...
इलेक्ट्रॉनिक मीडिया
इस धंधे को
ले आया है
पांच सितारा
संस्कृति तक
वहां खबरें
चमकती हैं
मटकती हैं
बिकती हैं
उंचे भाव में
इज्जत से ....
'नमन'

Friday, 7 April 2017

हाय! ये इश्क़ की मजबूरिया



हर सुबह इस आस में पूछा किए उसका मिजाज 
जाने किस दिन यार मेरा दे मोहब्बत का जवाब.

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हाय! ये इश्क़ की मजबूरिया
पास हो तुम मगर ये दूरिया।


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मुस्कुराकर न यूं मिला कीजे
थोड़ा सा दूर ही रहा कीजे.
दिल मेरा आप पर ना आ जाए
इतना मत सजा और संवरा कीजे.
अब मोहब्बत नहीं करता कोई
आप भी थोड़ी सी दगा कीजे.
आपके बिन न दिल मेरा धड़के
बेवजह इतना मत वफ़ा कीजे.
आप की आँखों में ख्वाब मेरे हो
इतना भी मत हमें चाहा कीजिए.
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एक खतरा उठा रहा हूँ मैं
उससे नज़रें मिला रहा हूँ मैं.
उसके लाखों हैं चाहने वाले
फिर भी किस्मत लड़ा रहा हूँ मैं.
जंग की बात करते हैं जाहिल
मोहब्बत आजमा रहा हूँ मैं .
मैं जानता हूँ हारना ही है
दाँव पर दिल लगा रहा हूँ मैं .
वो मुझे चाहे या की न चाहे
उसके ही गीत गा रहा हूँ मैं.
'नमन'

Tuesday, 4 April 2017

भारत का पाकिस्तानी करण

                           भारत का पाकिस्तानी करण 

यह हमें आपको तय करना है की भारत पाकिस्तान के अनुभव से सीखे या उस जैसा बने?
भारत का बौद्धिक वर्ग आज अगर अपने विचार , अपने अनुभव बांटने की कोशिश करता है तो उसे राष्ट्रद्रोही, सेक्युलर, वामपंथी आदि करार देकर पकिस्तान भेजने की बात इलेक्ट्रॉनिक मीडिया से लेकर सोशल मीडिया तक पर की जाती है. 
 आज के हिंदुस्तान की कट्टर हिंदूवादी राजनीती की तरह ही चालीस साल पहले जनरल ज़िया ने पाकिस्तान को इस्लामी राजनीति के जिस दलदल में धकेला था उससे बाहर निकलने में पकिस्तान आज तक असफल रहा  है.
मज़हबी सियासत वो जिन्न है जिसे बोतल से निकालना तो आसान है, लेकिन वापस बोतल में बंद करना किसी को नहीं आता. जनरल ज़िया कोई धार्मिक नेता नहीं, फ़ौजी जनरल और कमजोर शासक थे. बीजेपी की तरह ही उन्होंने लोकतंत्र को कुचलने के लिए उन्होंने धर्म का भरपूर इस्तेमाल किया.

पाकिस्तान के मौलवियों ने जनरल जिया की कमजोरी का पूरा फ़ायदा उठाया. देश के धार्मिक, भाषायी और नस्ली अल्पसंख्यकों को उग्र तरीक़े से हाशिये पर उसी तरह धकेला गया जैसे आज हिन्दुस्तान के हिन्दू संगठनों द्वारा मुसलमानों को धकेला जा रहा है.

पकिस्तान में हिंदुओं के मंदिर और ईसाइयों के चर्च तोड़ने, उन्हें धमकाने, उनकी लड़कियों का अपहरण करके उनसे जबरन शादी करने की वारदातें होती रहीं. धर्मपरायण गुंडे पूरे जोश और इत्मीनान के साथ अपना काम करते रहे क्योंकि इस पावन अभियान में सत्ता उनके साथ थी.
जमात-ए-इस्लामी से जुड़े छात्र संगठन इस्लामी जमात-ए-तलबा ने यूनिवर्सिटियों में हंगामा मचाया, प्रोफ़ेसरों और विरोधी छात्रों को पीटा, बहसों और सेमिनारों का सिलसिला बंद कराया, कॉलेजों की फ़िज़ा अकादमिक नहीं, धार्मिक और राष्ट्रवादी बनाई.
आज 'भारतीय विद्यार्थी परिषद' भी विश्व विद्यालयों में ठीक वही, मसलन हंगामा मचाना, प्रोफ़ेसरों और विरोधी छात्रों को पीटना, बहसों और सेमिनारों का सिलसिला बंद कराना, जो उनके साथ नहीं है उसे राष्ट्र द्रोही साबित करना आदि कर रहा है जो पाकिस्तान के छात्र संगठन वहां के शिक्षा संस्थानों में कर चुके हैं. 
पाकिस्तान के जिन कुछ लोगों को उस समय ये सब मंज़ूर नहीं था और जो इसकी आलोचना कर रहे थे, वे सेक्युलर, वामपंथी, बुद्धिजीवी और मानवाधिकारवादी टाइप के लोग थे. उन्हें गद्दार, इस्लाम-विरोधी और हिंदू-परस्त कहकर किनारे लगा दिया गया.
ठीक उसी तरह भारत में भी जिन लोगों को ये सब मंज़ूर नहीं है वे सेक्युलर, वामपंथी, बुद्धिजीवी और मानवाधिकारवादी टाइप के लोग कहे जा रहे हैं.  उन्हें राष्ट्रद्रोही, और मुस्लिम परस्त कहकर पाकिस्तान भेजने की बात की जा रही है.

उस ज़माने में पाकिस्तान का बहुसंख्यकों का धर्म 'इस्लाम ख़तरे में' था और आज भारत के १०० करोड़ हिन्दुओं का धर्म खतरे में है. 

पाकिस्तान के मुसलमानों में गर्व की भावना भरना ज़रूरी था इसलिए रातों-रात इतिहास की नई किताबें लिखी गईं, सम्राट अशोक से लेकर गांधी तक सबके नाम मिटाए गए. बच्चों को पढ़ाया जाने लगा कि अरब हमलावर मोहम्मद बिन क़ासिम की जीत से इतिहास शुरू होता है जिसने सिंध के हिंदू राजा दाहिर को हराया था.

आज भारत में भी इतिहास बदलने की बात हो रही है, सडकों -चौराहों के नाम बदले जा रहे हैं, धार्मिक संगठन सेनाएं तैयार कर रहे हैं, भर्तियाँ हो रही है.  सब वही किया जा रहा है जो ४० साल पहले पाकिस्तान में किया गया. 
जनरल जिया के पाकिस्तान में रमज़ान में रोज़ा न रखने वालों की पिटाई, जबरन खाने-पीने की दुकानें बंद कराना, दफ़्तरों में दोपहर की नमाज़ में शामिल न होने वालों का रजिस्टर रखा जाना, सरकारी कामकाज से पहले मौलवियों का ख़ुत्बा (प्रवचन), ये सब 1980 का दशक आते-आते जीवन शैली का हिस्सा हो गए.

आज भारत के हिन्दुओं में गर्व की भावना भरी जा रही है, 'गर्व से कहो हम भारतीय हैं' की जगह 'गर्व से कहो हम हिन्दू हैं के नारे लग रहे हैं', छाती कूटी जा रही है.  देश के विधान भवनों में साधू संत प्रवचन दे रहे हैं, लोगों के फ्रिज चेक किये जा रहे हैं, आप क्या खायेंगे, क्या पियेंगे, कैसे जियेंगे वह सब तय करेंगे . हमारा प्रधानमंत्री धर्म के ठेकेदारों के सामने हाथ बांधे खड़ा है. 
जनरल जिया के शासन में पाकिस्तान के उर्दू अख़बारों ने लगातार इस्लाम बेचा, लोगों को सही नहीं मनपसंद ख़बरें देते रहे, ज़िया या मौलवी से सवाल पूछने की हिम्मत किसी ने नहीं दिखाई. बाद में ये सिलसिला टीवी चैनलों ने भी जारी रखा. अलबत्ता 'डॉन' जैसे अख़बार पत्रकारिता करते रहे, लेकिन अंग्रेज़ी अख़बारों से माहौल कहाँ बनना-बदलना था?

बीजेपी के शासन में आज भारत के टीवी चैनल दिन रात राष्ट्रवाद के नकाब में धर्म बेच रहे हैं, किसी की हिम्मत नहीं है की मोदी जी या धार्मिक कट्टरपंथियों से सवाल पूंछ सके . सब वही दोहराया जा रहा है जो पाकिस्तान में हो चूका है.

जब सत्ता में बैठे लोग अपने फ़ायदे के लिए जनता के दिमाग़ में नफ़रत भरें तो उसका बुरा असर कई पीढ़ियों तक ख़त्म नहीं होता. आज भारत में हिन्दुओं के दिमाग में लगातार नफरती बारूद भरा जा रहा है, इसका विस्फोट कितना भयावह होता है यह आप पाकिस्तान की हालत देख कर समझ सकते हैं. 

पाकिस्तान के लोग चालीस साल बाद मज़हबी सियासत के दलदल से निकलने के लिए हाथ-पैर मार रहे हैं, क्योंकि आज पाकिस्तान को सारी दुनियां आतंकवादी राष्ट्र कहती है, पाकिस्तानियों को विदेश में नौकरियां मिलना बंद हो गया है, उन्हें हिक़रात भरी नज़रों का सामना करना पड रहा है.
इस साल नवाज़ शरीफ़ का होली मिलन कार्यक्रम में जाना यही जताने के लिए था कि पाकिस्तान के हिंदू भी देश के नागरिक हैं. जब कि भारत उसी दलदल की तरफ़ पूरे जोश के साथ बढ़ रहा है?
अगर हम समय रहते नहीं चेते तो कल भारत भी कट्टरवादी ताक़तों के कब्ज़े में होगा और हमारा हाल भी पाकिस्तान जैसा होगा. पाकिस्तान की तरह हमारे विद्यालयों में भी हिन्दू ही हिन्दू बच्चों की लाशें बिछाएगा, हिन्दू ही हिन्दू मंदिरों में बम विस्फोट करेगा, हिन्दू कट्टरवादी ही हमारे हवाई अड्डों को ध्वस्त करते नज़र आयेंगे, हिन्दू कट्टरवादी ही हिन्दू माँ बहनों पर अत्याचार करेंगे , उन पर बलात्कार करेंगे , सडकों पर ५००-५०० , १०००-१००० बन्दुक धारी सेनाएं निकलेंगी .

माँ -बहनों, बच्चों की जिंदगी नरक हो जाएगी, कोई देश भारतीयों  को नौकरी के लिए वीसा नहीं देगा, शिक्षा संस्थानो में ताला लग जायेगा. अगर आप भारत में पाकिस्तान जैसे हालात नहीं पैदा करना चाहते तो जागिये, यह आवाज़ उठाने का वक़्त है. 
जागो -भारत जागो !
'नमन'

Sunday, 26 March 2017

किसान का पैगाम


हमें लगता है शहादत का इरादा है तेरा
वरना किसकी मजाल है जो सच को सच कह दे। 
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मैं किन के निशाने पे हूँ यह जानता हूँ मैं
थोडा बहुत उसकी नजर पहचानता हूँ मैं।
नफरत का बोझ हमसे उठाया न जायेगा
सिर्फ मोहब्बत को खुदा मानता हूँ मैं।  
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किसान का पैगाम
भले ही सूख गए हैं नहर और कुंवे सब
हमारी आँख के आंसू अभी सलामत हैं।  

पेट में रोटी और बदन पे पैरहन न सही
हमारे दिल में देश के लिए मोहब्बत है।  
हम नेता नहीं जो झूठ की सियासत करें
हमारे दिलों में सबके लिए मुरव्वत है।  
हमारी धरती माँ सबका पेट भरती है
उसकी सेवा ही हमारे लिए इबादत है।  
तुम्हे नफरत मुबारक और मुहब्बत हमको
हमारी भारत माता ही हमारी जन्नत है।
'नमन'