Wednesday, 3 May 2017

वजह


यूँ बेवजह न प्यार से हमको पुकारिए
है प्यार अब गुनाह सियासत की नजर में. 

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हमने बरसों से मोहब्बत को खुदा माना है 
अपने महबूब की बातों को दुआ माना है.
इश्क मजहब है और ग़ज़लें ही भजन है मेरा
हमने दुनिया के रिवाजों को कहाँ माना है?

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मरने की मनाही है जीने भी नहीं देते
हाथों में जाम है पर पीने भी नहीं देते.
मैं जिसको चाहता हूँ जो है मेरा मुकद्दर
कैसे उसके ख्वाब देखूं सोने भी नहीं देते. 

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तमाम रात अंधेरे से जंग जारी थी
हर जुगनू की मर मिटने की तैयारी थी.
सुबह हुई तो जुगनुओं का कहीं पता न था 
सुबह की रात में सोए हुओं से यारी थी.


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दर्द हैं , आंसू हैं, गम है और तन्हाई है 
जिंदगी हमें ए किस मोड़ पर ले आई है.
मैं तेरे गम में शामिल तो नहीं हो सकता 
तेरे ग़म में मगर आंखें मेरी भर आई है.

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--खबरें रखैल है--
खबरें रखैल हैं
सत्ताधीशों की
पूंजी पतियों की 
भ्रष्ट अफसरों की...
रोज ब रोज
काला होता है
अखबारों का
मुख (पत्र )
बदनाम
बिकी हुई खबरें
फैलाती हैं सनसनी...
संपादक
बदनाम गली के बाहर
तैनात
वह पुलिसिया है
जो मजबूरी में
दूसरी तरफ देखते रहता है
आखिर उसका भी पेट है...
इलेक्ट्रॉनिक मीडिया
इस धंधे को
ले आया है
पांच सितारा
संस्कृति तक
वहां खबरें
चमकती हैं
मटकती हैं
बिकती हैं
उंचे भाव में
इज्जत से ....
'नमन'

Friday, 7 April 2017

हाय! ये इश्क़ की मजबूरिया



हर सुबह इस आस में पूछा किए उसका मिजाज 
जाने किस दिन यार मेरा दे मोहब्बत का जवाब.

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हाय! ये इश्क़ की मजबूरिया
पास हो तुम मगर ये दूरिया।


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मुस्कुराकर न यूं मिला कीजे
थोड़ा सा दूर ही रहा कीजे.
दिल मेरा आप पर ना आ जाए
इतना मत सजा और संवरा कीजे.
अब मोहब्बत नहीं करता कोई
आप भी थोड़ी सी दगा कीजे.
आपके बिन न दिल मेरा धड़के
बेवजह इतना मत वफ़ा कीजे.
आप की आँखों में ख्वाब मेरे हो
इतना भी मत हमें चाहा कीजिए.
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एक खतरा उठा रहा हूँ मैं
उससे नज़रें मिला रहा हूँ मैं.
उसके लाखों हैं चाहने वाले
फिर भी किस्मत लड़ा रहा हूँ मैं.
जंग की बात करते हैं जाहिल
मोहब्बत आजमा रहा हूँ मैं .
मैं जानता हूँ हारना ही है
दाँव पर दिल लगा रहा हूँ मैं .
वो मुझे चाहे या की न चाहे
उसके ही गीत गा रहा हूँ मैं.
'नमन'

Tuesday, 4 April 2017

भारत का पाकिस्तानी करण

                           भारत का पाकिस्तानी करण 

यह हमें आपको तय करना है की भारत पाकिस्तान के अनुभव से सीखे या उस जैसा बने?
भारत का बौद्धिक वर्ग आज अगर अपने विचार , अपने अनुभव बांटने की कोशिश करता है तो उसे राष्ट्रद्रोही, सेक्युलर, वामपंथी आदि करार देकर पकिस्तान भेजने की बात इलेक्ट्रॉनिक मीडिया से लेकर सोशल मीडिया तक पर की जाती है. 
 आज के हिंदुस्तान की कट्टर हिंदूवादी राजनीती की तरह ही चालीस साल पहले जनरल ज़िया ने पाकिस्तान को इस्लामी राजनीति के जिस दलदल में धकेला था उससे बाहर निकलने में पकिस्तान आज तक असफल रहा  है.
मज़हबी सियासत वो जिन्न है जिसे बोतल से निकालना तो आसान है, लेकिन वापस बोतल में बंद करना किसी को नहीं आता. जनरल ज़िया कोई धार्मिक नेता नहीं, फ़ौजी जनरल और कमजोर शासक थे. बीजेपी की तरह ही उन्होंने लोकतंत्र को कुचलने के लिए उन्होंने धर्म का भरपूर इस्तेमाल किया.

पाकिस्तान के मौलवियों ने जनरल जिया की कमजोरी का पूरा फ़ायदा उठाया. देश के धार्मिक, भाषायी और नस्ली अल्पसंख्यकों को उग्र तरीक़े से हाशिये पर उसी तरह धकेला गया जैसे आज हिन्दुस्तान के हिन्दू संगठनों द्वारा मुसलमानों को धकेला जा रहा है.

पकिस्तान में हिंदुओं के मंदिर और ईसाइयों के चर्च तोड़ने, उन्हें धमकाने, उनकी लड़कियों का अपहरण करके उनसे जबरन शादी करने की वारदातें होती रहीं. धर्मपरायण गुंडे पूरे जोश और इत्मीनान के साथ अपना काम करते रहे क्योंकि इस पावन अभियान में सत्ता उनके साथ थी.
जमात-ए-इस्लामी से जुड़े छात्र संगठन इस्लामी जमात-ए-तलबा ने यूनिवर्सिटियों में हंगामा मचाया, प्रोफ़ेसरों और विरोधी छात्रों को पीटा, बहसों और सेमिनारों का सिलसिला बंद कराया, कॉलेजों की फ़िज़ा अकादमिक नहीं, धार्मिक और राष्ट्रवादी बनाई.
आज 'भारतीय विद्यार्थी परिषद' भी विश्व विद्यालयों में ठीक वही, मसलन हंगामा मचाना, प्रोफ़ेसरों और विरोधी छात्रों को पीटना, बहसों और सेमिनारों का सिलसिला बंद कराना, जो उनके साथ नहीं है उसे राष्ट्र द्रोही साबित करना आदि कर रहा है जो पाकिस्तान के छात्र संगठन वहां के शिक्षा संस्थानों में कर चुके हैं. 
पाकिस्तान के जिन कुछ लोगों को उस समय ये सब मंज़ूर नहीं था और जो इसकी आलोचना कर रहे थे, वे सेक्युलर, वामपंथी, बुद्धिजीवी और मानवाधिकारवादी टाइप के लोग थे. उन्हें गद्दार, इस्लाम-विरोधी और हिंदू-परस्त कहकर किनारे लगा दिया गया.
ठीक उसी तरह भारत में भी जिन लोगों को ये सब मंज़ूर नहीं है वे सेक्युलर, वामपंथी, बुद्धिजीवी और मानवाधिकारवादी टाइप के लोग कहे जा रहे हैं.  उन्हें राष्ट्रद्रोही, और मुस्लिम परस्त कहकर पाकिस्तान भेजने की बात की जा रही है.

उस ज़माने में पाकिस्तान का बहुसंख्यकों का धर्म 'इस्लाम ख़तरे में' था और आज भारत के १०० करोड़ हिन्दुओं का धर्म खतरे में है. 

पाकिस्तान के मुसलमानों में गर्व की भावना भरना ज़रूरी था इसलिए रातों-रात इतिहास की नई किताबें लिखी गईं, सम्राट अशोक से लेकर गांधी तक सबके नाम मिटाए गए. बच्चों को पढ़ाया जाने लगा कि अरब हमलावर मोहम्मद बिन क़ासिम की जीत से इतिहास शुरू होता है जिसने सिंध के हिंदू राजा दाहिर को हराया था.

आज भारत में भी इतिहास बदलने की बात हो रही है, सडकों -चौराहों के नाम बदले जा रहे हैं, धार्मिक संगठन सेनाएं तैयार कर रहे हैं, भर्तियाँ हो रही है.  सब वही किया जा रहा है जो ४० साल पहले पाकिस्तान में किया गया. 
जनरल जिया के पाकिस्तान में रमज़ान में रोज़ा न रखने वालों की पिटाई, जबरन खाने-पीने की दुकानें बंद कराना, दफ़्तरों में दोपहर की नमाज़ में शामिल न होने वालों का रजिस्टर रखा जाना, सरकारी कामकाज से पहले मौलवियों का ख़ुत्बा (प्रवचन), ये सब 1980 का दशक आते-आते जीवन शैली का हिस्सा हो गए.

आज भारत के हिन्दुओं में गर्व की भावना भरी जा रही है, 'गर्व से कहो हम भारतीय हैं' की जगह 'गर्व से कहो हम हिन्दू हैं के नारे लग रहे हैं', छाती कूटी जा रही है.  देश के विधान भवनों में साधू संत प्रवचन दे रहे हैं, लोगों के फ्रिज चेक किये जा रहे हैं, आप क्या खायेंगे, क्या पियेंगे, कैसे जियेंगे वह सब तय करेंगे . हमारा प्रधानमंत्री धर्म के ठेकेदारों के सामने हाथ बांधे खड़ा है. 
जनरल जिया के शासन में पाकिस्तान के उर्दू अख़बारों ने लगातार इस्लाम बेचा, लोगों को सही नहीं मनपसंद ख़बरें देते रहे, ज़िया या मौलवी से सवाल पूछने की हिम्मत किसी ने नहीं दिखाई. बाद में ये सिलसिला टीवी चैनलों ने भी जारी रखा. अलबत्ता 'डॉन' जैसे अख़बार पत्रकारिता करते रहे, लेकिन अंग्रेज़ी अख़बारों से माहौल कहाँ बनना-बदलना था?

बीजेपी के शासन में आज भारत के टीवी चैनल दिन रात राष्ट्रवाद के नकाब में धर्म बेच रहे हैं, किसी की हिम्मत नहीं है की मोदी जी या धार्मिक कट्टरपंथियों से सवाल पूंछ सके . सब वही दोहराया जा रहा है जो पाकिस्तान में हो चूका है.

जब सत्ता में बैठे लोग अपने फ़ायदे के लिए जनता के दिमाग़ में नफ़रत भरें तो उसका बुरा असर कई पीढ़ियों तक ख़त्म नहीं होता. आज भारत में हिन्दुओं के दिमाग में लगातार नफरती बारूद भरा जा रहा है, इसका विस्फोट कितना भयावह होता है यह आप पाकिस्तान की हालत देख कर समझ सकते हैं. 

पाकिस्तान के लोग चालीस साल बाद मज़हबी सियासत के दलदल से निकलने के लिए हाथ-पैर मार रहे हैं, क्योंकि आज पाकिस्तान को सारी दुनियां आतंकवादी राष्ट्र कहती है, पाकिस्तानियों को विदेश में नौकरियां मिलना बंद हो गया है, उन्हें हिक़रात भरी नज़रों का सामना करना पड रहा है.
इस साल नवाज़ शरीफ़ का होली मिलन कार्यक्रम में जाना यही जताने के लिए था कि पाकिस्तान के हिंदू भी देश के नागरिक हैं. जब कि भारत उसी दलदल की तरफ़ पूरे जोश के साथ बढ़ रहा है?
अगर हम समय रहते नहीं चेते तो कल भारत भी कट्टरवादी ताक़तों के कब्ज़े में होगा और हमारा हाल भी पाकिस्तान जैसा होगा. पाकिस्तान की तरह हमारे विद्यालयों में भी हिन्दू ही हिन्दू बच्चों की लाशें बिछाएगा, हिन्दू ही हिन्दू मंदिरों में बम विस्फोट करेगा, हिन्दू कट्टरवादी ही हमारे हवाई अड्डों को ध्वस्त करते नज़र आयेंगे, हिन्दू कट्टरवादी ही हिन्दू माँ बहनों पर अत्याचार करेंगे , उन पर बलात्कार करेंगे , सडकों पर ५००-५०० , १०००-१००० बन्दुक धारी सेनाएं निकलेंगी .

माँ -बहनों, बच्चों की जिंदगी नरक हो जाएगी, कोई देश भारतीयों  को नौकरी के लिए वीसा नहीं देगा, शिक्षा संस्थानो में ताला लग जायेगा. अगर आप भारत में पाकिस्तान जैसे हालात नहीं पैदा करना चाहते तो जागिये, यह आवाज़ उठाने का वक़्त है. 
जागो -भारत जागो !
'नमन'

Sunday, 26 March 2017

किसान का पैगाम


हमें लगता है शहादत का इरादा है तेरा
वरना किसकी मजाल है जो सच को सच कह दे। 
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मैं किन के निशाने पे हूँ यह जानता हूँ मैं
थोडा बहुत उसकी नजर पहचानता हूँ मैं।
नफरत का बोझ हमसे उठाया न जायेगा
सिर्फ मोहब्बत को खुदा मानता हूँ मैं।  
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किसान का पैगाम
भले ही सूख गए हैं नहर और कुंवे सब
हमारी आँख के आंसू अभी सलामत हैं।  

पेट में रोटी और बदन पे पैरहन न सही
हमारे दिल में देश के लिए मोहब्बत है।  
हम नेता नहीं जो झूठ की सियासत करें
हमारे दिलों में सबके लिए मुरव्वत है।  
हमारी धरती माँ सबका पेट भरती है
उसकी सेवा ही हमारे लिए इबादत है।  
तुम्हे नफरत मुबारक और मुहब्बत हमको
हमारी भारत माता ही हमारी जन्नत है।
'नमन'

Saturday, 25 March 2017

तौहीन




मोहब्बत की गमींं भी क्या गमीं है 
मोहब्बत में गमों की क्या कमी है। 
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यूँ बेवजह न प्यार से हमको पुकारिए 
है प्यार अब गुनाह सियासत की नजर में। 

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वह बेवफा हुआ तो हमें यह पता चला 
इन इश्क की गलियों में वफादार नहीं हैं.
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है ऐसा क्यों कि कोई बेवजह ही याद आता है
मेरे ख्वाबों में आकर वह मुझे बेहद सताता है। 

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होश में आऊं तब तो जाम उठाऊं यारों
उससे नजरें मिलाके होश गवां बैठा हूँ। 

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शराब होठों से लगाएं तो लगाएं कैसे
तेरी मस्त निगाहों की तौहीन हो ना जाए।  

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ग़मों से प्यार करो , आंसुओं के जाम पियो 
किसी से प्यार करो, लेके उसका नाम जियो।  

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कृष्ण के देश में
साधु के भेष में
प्रेम को है लगाई
बेड़ी कंस ने.
खड्ग नफरत की
बाहर म्यानो के है
बातें अब कब्रगाहों
श्मशानों की हैं.
हम मोहब्बत करें
भी तो कैसे करें
प्रेमियों की जगह
कैदखानों में है.
नमन

Sunday, 19 March 2017

हिन्दू तालिबान

                                                     
भारतीय नेताओं और भारतीय जनमानस को अरब देशों इराक,ईरान,सीरिया, अफगानिस्तान और पाकिस्तान आदि से सबक लेना चाहिए .
अरब देशों में कच्चे तेल के उत्पादन के कारण अचानक बड़ी तेजी से आई समृद्धि से यूरोप और अमेरिका के देश घबरा गए.
अगर कच्चे तेल का उत्पादन करने वाले देश अपने आर्थिक संसाधनों का उपयोग उद्योगों को बढ़ावा देने और रोजमर्रा की आवश्यक चीजों के उत्पादन पर खर्च करते तो यूरोप और अमेरिका के देशों की कंपनियां जो लगातार अरब देशों के रोजमर्रा की जरूरत की चीजें उन्हें निर्यात कर रही थी उनमे ताला लग जाता .
इन्हें रोकने का उनके पास एक ही इलाज था कि यहां पर धार्मिक आतंकवाद को बढ़ावा दिया जाए ताकि यहां का अर्थतंत्र पूरी तरह ध्वस्त हो और अमेरिका और यूरोप में बने जरूरत के सामान और युद्ध के हथियार यह देश लगातार खरीद सके . जिससे यूरोप और अमेरिका के उद्योग धंधों और आर्थिक संस्थाओं को लाभ हो.
अगर हम जरा भी दिमाग लगाकर सोचें तो पाएंगे कि अगर यूरोप और अमेरिका की हथियार कंपनियां तमाम मुसलमान आतंकी संगठनों को हथियार बेचना बंद कर दें तो आतंकवाद अपने आप खत्म हो जाएगा .
पर क्या वे ऐसा करेंगे ?
नहीं .
क्योंकि अरब देशों के आतंकवाद से यूरोप और अमेरिका की कंपनियां लगातार आर्थिक लाभ कमा रही है.
कच्चे तेल के उत्पादन से जो अकूत धन संपत्ति अरब देशों के पास आई थी उनका उचित उपयोग अगर उन देशो ने किया होता तो दुनिया के तमाम उत्पादन, तमाम चीजें बनाने की कंपनियां आज अरब देशों में होती और वह दुनिया के सबसे बड़े निर्यातक होते.
अगर ऐसा हुआ होता तो आज यूरोप और अमेरिका की हजारों बहुराष्ट्रीय कंपनियां आर्थिक मंदी की शिकार होकर बंद हो गई होती.
अरब देश उत्पादक ना होकर उपभोक्ता बने रहें इसी में यूरोप और अमेरिका का भला था .
इस काम के लिए उन्होंने मुसलमान मुल्ला मौलवियों को आगे करके इस्लामिक आतंकवाद का भूत खड़ा किया और अरब राष्ट्रों को तबाह कर दिया.
आज भारत 125 करोड़ उपभोक्ताओं वाला देश है भारत में जिस तेजी से औद्योगिकरण हो रहा था,
जिस तेजी से हम सिर्फ उपभोक्ता ना होकर अपनी उत्पादकता बढ़ाकर , निर्यातक बनते जा रहे थे वह यूरोप और अमेरिका के देश पचा नहीं पा रहे थे.
चार दशक पहले तक जो देश अनाज और कपड़े से लेकर अपनी सारी जरूरत की चीजें यूरोप और अमेरिका से आयात कर रहा था वह इन 40 -50 वर्षों में अचानक इतना प्रगति कर गया कि उसकी कंपनियां यूरोप और अमेरिका की बहुराष्ट्रीय कंपनियों से टक्कर लेने लगी.
यह यूरोप और अमेरिका के देशों के लिए चिंता का विषय बना.
अरब देशों की तर्ज पर अमेरिका और यूरोप के देश यह चाहते हैं कि भारत में भी धार्मिक आतंकवाद का उदय हो. अस्थिरता हो, हम धर्म के नाम पर आपस में लड़े , उद्योग धंधे बंद हो और हर चीज के लिए , अपनी हर आवश्यकता के लिए हम यूरोप और अमेरिका की तरफ देखें ताकि उनका व्यापार उनका व्यवसाय जो मंदी की चपेट में आ गया है पुनर्जीवित हो सके.
कम पढ़ा लिखा होने की वजह से भारत का मुस्लिम नागरिक पहले ही मूल्ला मौलवियों और अपने धार्मिक गुरुओं के चंगुल में फंसा हुआ था. जो लगातार मैं न सिर्फ उनका आर्थिक दोहन कर रहे थे बल्कि उन्हें हिंदुओं के खिलाफ भड़का रहे थे.
1990 के दशक के बाद हिंदू कट्टरवाद नेभी भारत में अपनी जड़ें मजबूत करना शुरू कर दिया .
पश्चिम के देश इसे बड़े ध्यान से देख रहे थे.
धीरे-धीरे हिंदू धार्मिक संगठन मजबूत होते चले गए.
इन सब के पास कहां से इतना धन आया , कहां से इन्हें अपने बड़े बड़े संगठन चलाने के लिए लगातार पैसा मिला, यह एक शोध का विषय है.
मेरी चिंता यह नहीं है कि हिंदू संगठन क्यों आर्थिक रुप से समृद्ध हुए और कैसे समृद्ध हुए ?
मैं खुद ब्राह्मण हूं , हिंदू हूं, काशी और प्रयाग की, गंगा की भूमि से हूं , हिंदू संस्कृति पर , सनातन धर्म पर मेरी अगाध श्रद्धा है, वह मेरे हृदय का हिस्सा है, और इसीलिए यह मेरी चिंता है कि हिंदू धर्म तभी मजबूत हो सकेगा जब भारत मजबूत होगा .
जब भारत का आर्थिक और औद्योगिक विकास होगा. जब भारत में स्थाईत्व होगा , जब भारत में आंतरिक कलह नहीं होगा ,जब भारत सुरक्षित होगा तभी हम आर्थिक और औद्योगिक क्षेत्र में यूरोप और अमेरिका के देशों को टक्कर दे सकेंगे.
अब हमें यह तय करना होगा कि क्या स्वार्थी मुल्ला मौलवियों और कुछ दिग्भ्रमित मुसलमान युवकों
एवम् लालची और सत्ता के लिए कुछ भी करने को लालायित हिंदू पोंगा पंथियों का कहना मान कर देश को अंतर्कलह के उस अंधे कुएं में ढकेल दें जिसमें जिसमें पूरा अरब विश्व और मुसलमान देश गिर चुके हैं .
या अकल से काम लें और धर्म के इन व्यापारियों को कहे कि वे हम सब हिंदू ,मुसलमान, सिख, इसाई, पारसी भारतीयों को भाई चारे के साथ जीने दे,
ताकि हम सब मिलकर एक मजबूत हिंदुस्तान को और मजबूत हिंदुस्तान बनाएं .
उसे दुनिया का नंबर एक देश बना सकें और एक मिसाल कायम करें पूरी दुनिया के लिए.
हम दुनिया से कह सकें की आओ और देखो मनुष्यता अगर कहीं पलती बढ़ती है तो हमारे देश में.
आइए एक सशक्त हिंदुस्तान के लिए, अपने देश को दुनिया का सबसे समृद्ध और सबसे शक्तिशाली देश बनाने के लिए आपस की छोटी-छोटी लड़ाइयां बंद करें और गरीबी अशिक्षा और बेकारी के खिलाफ बड़ी लड़ाई के लिए हाथ मिलाए.

नमन 

Tuesday, 14 March 2017

कविता


जब भी 
वेदना को मिलते हैं स्वर 
गढ़ी जाती है 
एक कविता
कविता 
ह्रदय की भाषा है
आत्मा का
श्रृंगार है कविता
कविता
सिर्फ शब्दों का मायाजाल नहीं है
कविता है
मनुष्य की उत्सवधर्मिता
भविष्य की चेतना
समाज का संघर्ष
कवि
कविता करता नहीं
कविता जीता है अपने अंदर
कवि होना
अच्छा मनुष्य होना है
प्रेम, त्याग ,बलिदान
और राष्ट्रप्रेम की थाती है कविता
कविता करती है आज का मूल्यांकन
कविता देती है कल के लिए संदेश
कविता दोहराती है बीत चुके कल को
नमन

Friday, 10 March 2017


प्रश्न ?
क्या करते हो ?
मैंने कहा -मोहब्बत 
क्या कहा ! मोहब्बत 
इससे भी भला किसी का पेट भरता है
फिर खाते क्या हो?
गालियां, मैंने जवाब दिया 
उसकी आँखों में आश्चर्य था 
गालियां क्यों?
क्यों की मैं मोहब्बत करता हूँ
मैं समझा नहीं, वह अचकचाया 
फिर प्रश्न किया-
ये फटेहाल क्यों हो 
इसलिए की मैं मोहब्बत करता हूँ 
मेरा जवाब था 
उसने मेरा कालर पकड़ लिया 
स्साले ! 
ये मोहब्बत -मोहब्बत क्या लगा रखा है
इसलिए की मुझे और कुछ आता ही नहीं 
अब वह मुझे पीटते हुए हांफ रहा था 
सुबह-सुबह 
दिमाग का दही बना दिया
मोहब्बत -मोहब्बत रटे जा रहा है 
पागल है स्साला
उसने मुझे एक तरफ धकेल दिया 
और सड़क पर निकल रहे जुलुस की 
सुरक्षा में लग गया 
भीड़ नारे लगा रही थी 
..........   मुर्दाबाद !
..........   हाय- हाय !

नमन

Thursday, 2 March 2017

सच के पत्थर


उसकी आँखें कमाल करती हैं 
कैसे कैसे सवाल करती है।  
उनमें मोहब्बत ही मोहब्बत है मगर 
मेरा जीना मुहाल करती हैं।
 

---- सच के पत्थर हमें मारो लहूलुहान करो
खुशबु फरेब के फूलों की हमें कबूल नहीं। 


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उनको आईना दिखाने की जुर्रत की है 
उसने सच बोल कर सत्ता से बगावत की है . 
उसको सूली पर चढ़ा दो या बिठा लो सर पर
मुल्क से उसने मोहब्बत की हिमायत की है. 


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लोक तंत्र में
चुनाव वह झुनझुना है
जिसे पकड़ा दिया गया है
जनता के हाथ में
ताकि वह
अपनी तकलीफें भूल कर
उसे बजाने मे मस्त रहे
और माई -बाप 
मालपुवा उड़ाने में 
व्यस्त रहें। 

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तेरी नजरों के एक इशारे पर
हमने बर्बाद कर लिया खुद को.


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तमाम रात रोशनी रही ख्यालों में ,
उसकी यादों ने हमें रात भर सोने न दिया। 


नमन

Sunday, 26 February 2017

आधे-अधूरे मानव शरीर


टाटों पर बैठ कर
उन्होंने की थी पढ़ाई
टूटी फूटी मडई में
कभी आम तो कभी
बरगद या नीम की छांव में 
मुंशी जी की छड़ी से
गढ़े गए थे इंसान
पढ़ाया गया था उन्हें
देश प्रेम का पाठ ...

काठ की काली की गई
पटरियों पर
उन्होंने लिखे
अनंत शुभ्र सुंदर लेख
नाक सुडकते हुए
वे गाते रहे
सरस्वती वंदना और राष्ट्रगीत ...
नहीं दी उन्होंने
देश को गाली
नहीं रोया गरीबी का रोना
नहीं कहा अपने पितामह
और प्रपितामह को नालायक ...
गरमी की धूप में
नंगे पैर
मीलों चलकर
पहुंचे स्कूल
रचा प्रगतिशील भारत ...
हजारों
आईएएस-आईपीएस-आईआरएस
उस दिन बन गए
जिस दिन पंडित जी ने पहली बार
उन्हें बनाया था मुर्गा
अपना कान पकड़ते पकड़ते
उनकी पकड़ में कब आ गई
देश की नब्ज
खुद उन्हें भी पता न चला ...
छाती फुलाकर
देशप्रेम का गीत गाते गाते
फटे चकती लगे कपड़ों में से
प्रकट हो गए
कितने ही उत्कृष्ट वक्ता
नायक -महानायक ....
और आज
स्कूल और कॉलेज के
वातानुकूलित भवन
पैदा कर रहे हैं
उद्योगों में काम करने वाले
टेक्निकल मजदूर यानी इंजीनियर
उद्योगपतियों की जी हुजूरी करने वाले क्लर्क- एम.बी.ए.
खून चूसने वाले डॉक्टर
सफेद को काला
और काले को सफेद करने वाले
अधिवक्ता
देश को खोखला करने वाले नेता....
आज
प्रगति के शिखरों पर बैठे हैं
अकर्मण्य -अभिशप्त
आधे-अधूरे मानव शरीर
आधे-अधूरे मानव शरीर...
'नमन'