Tuesday, 9 July 2019

मोहब्बत




तुझे हक है की तू मेरा मसीहा मत बन 
एक अहसान कर मुझपे मेरा कातिल बन जा।  
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तुम्हारे दिल से हमारे दिल तक
इक राह जो हमने थी बनायी
तू दूर है तो दिल है तड़पता
और मेरी आँखें छलक रही हैं।
न मैंने तुझको कभी पुकारा
न तूने ही मुझे आवाज दी है
मगर मेरे दिल में तेरी चाहत 
बन के धड़कन धडक रही है।
न अबकी गर्मी में दिल पसीजा 
न अब की बारिश में आँख नम है
न अबकी बाग़ों में फूल आए 
मेरी मोहब्बत तड़प रही है।
नहीं ज़रूरी है हो मोहब्बत
हमको तुमसे और तुमको हमसे
पर तेरी फ़ुरकत का गम है इतना
कि मेरी सांसे सिसक रही हैं।
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आँख नम हैं गमीं का मौसम है
तू नहीं है तो ज़िंदगी कम है।
तुझको चाहा है बड़ी शिद्दत से
मेरी दुनियाँ तुझी से क़ायम है।
तू मुझे ऐसे पराया न समझ
तू मेरा दोस्त मेरा हमदम है।
चल रही आँधियाँ है नफ़रत की
हर तरफ़ हादसों का आलम है ।
जहाँ कल तक थी मोहब्बत कायम
वहाँ हर एक घर में मातम है।
नमन 

Sunday, 30 June 2019

देश



खो गया है देश का चैन और अमन
क़ातिलों के हाथ में अब है वतन.
नाम लेकर राम और श्रीराम का
भीड़ हत्या कर रही है आदतन.
राम भी ख़तरे में है रहमान भी
भेड़ियों का शहर में है आगमन.
नफ़रतों का हर तरफ़ साम्राज्य है
मज़हबी ज्वाला में जलता है चमन.
न्याय और क़ानून कल की बात है
देश में है राज डंडे का ‘नमन’


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हमारा कत्ल कर कातिल हमें ठहराया गया
हमे  ही लूटकर लुटेरा हमें बताया गया ।
ए वतन तेरा है मेरा है हम सभी का है
मेरे अपनों को मगर बेवजह सताया गया ।
जिस ज़मीन  के लिए हमने शहादत दी थी
उसी माटी में हमें मार कर दफनाया गया।
हमने मर कर भी वफ़ादारी निभाई लेकिन
हम पर ग़द्दारी का आरोप ही लगाया गया ।
नमन 
                                                                          
                                                                      कांग्रेस 

28 दिसम्बर 1885 , बॉम्बे का गोकुलदास तेजपाल संस्कृत महाविद्यालय साक्षी बना भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस नामक उस संगठन की स्थापना का जिसने आगे चल कर गुलाम भारत की दशा और दिशा बदल दी । 

दिनशा वाचा , ए ओ हयूम और दादा भाई नौरोजी के आवाहन पर देश भर से आए 72 प्रतिनिधियों ने व्योमेशचन्द्र मुखर्जी को भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस का पहला अध्यक्ष चुना। 

1885 से 1910 के दशक तक यह संगठन अधिकतर समय भारत पर शासन कर रहे ब्रिटिश शासको से भारतीय नागरिकों के हितों की बात करता रहा था । 

बाल गंगाधर तिलक के उद्घोष " स्वतन्त्रता मेरा जन्मसिद्ध अधिकार है और मैं वह लेकर रहूँगा" , 1915 मे महात्मा गांधी के भारत आगमन और  जलियावाला बाग के नरसंघार के बाद पूर्ण स्वतंत्रता की मांग ने ज़ोर पकड़ा और कांग्रेस के लाहौर अधिवेसन मे रावी नदी के तट पर भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के अध्यक्ष पंडित जवाहरलाल नेहरू की अध्यक्षता मे 31 दिसंबर 1929 को कांग्रेस ने पूर्ण स्वराज का प्रस्ताव पारित किया और इसके ठीक 26 दिन बाद 26 जनवरी 1930 को भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने पूर्ण स्वराज्य की घोषणा कर दी । 

आरएसएस , हिन्दू महासभा के कुछ घटकों , डॉ श्यामप्रसाद मुखर्जी और सावरकर जैसे नेताओं के द्वारा "भारत छोड़ो आंदोलन" का विरोध करने, आज़ाद हिन्द फौज के खिलाफ बर्मा बार्डर पर लड़ने के लिए डॉ श्यामाप्रसाद मुखर्जी और आरएसएस द्वारा पूरे देश मे कैंप लगाकर भारतीय युवकों की ब्रिटिश सेना मे भर्ती करवाने के बावजूद देश 15 अगस्त 1947 को स्वतंत्र हुआ। 

संविधान सभा के लगभग सारे सदस्य(डॉ श्यामाप्रसाद मुखर्जी और डॉ बाबा साहब अंबेडकर के अलावा)  कांग्रेस के सदस्य थे। कांग्रेस के अधिकांश सदस्य साम्यवाद की कम्युनिस्ट विचारधारा से प्रभावित भी थे और सोवियत रूस और चीन की तर्ज़ पर भारत मे एक पार्टी वाला संविधान बना सकते थे। परंतु यह पंडित नेहरू ही थे जिन्होने भारत मे बहुदलीय प्रजातन्त्र  की स्थापना के लिए संविधान सभा के सदस्यों को लगातार प्रेरित किया और उन्हे इसमे डॉ बाबा साहब अंबेडकर जैसे विद्वानो का सहयोग मिला। 

महात्मा गांधी की इच्छा के अनुसार पंडित नेहरू ने स्वतन्त्रता की लड़ाई लड़ने वाली कांग्रेस से अलग हट कर स्वतन्त्रता के बाद की चुनावी राजनीति मे भाग लेने के लिए खुद को तैयार कर रही नई भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस का संविधान बनवाया । 
स्वतन्त्रता के बाद की कांग्रेस और स्वतन्त्रता के पहले की कांग्रेस के ध्येय , नियम , आकांक्षाएँ और कार्यप्रणाली एकदम अलग हैं । 

स्वतन्त्रता के बाद देश की जनता ने कांग्रेस के 6 और विपक्ष के 8 प्रधानमंत्रीयों को चुना और उन्हे देश चलाने का मौका दिया। 

स्वतन्त्रता के बाद कांग्रेस ने 550 रियासतों को जोड़ कर देश बनाया, कश्मीर को जोड़ा, 1955 मे फ्रांस से पॉन्डिचेरी को देश मे जोड़ा, 1961 मे पुर्तगाल से छीन कर गोवा और दमन दीव को देश मे जोड़ा, 1974 मे सिक्किम को देश मे जोड़ा और देश की सीमाओं को आज का स्वरूप दिया । 

आज संघ परिवार हमारे उन पुरखों पर मिथ्या दोषारोपण करके उनका चरित्र हनन करने मे दिन रात एक कर रहा है  जिन्होने अपने त्याग और बलिदान से न केवल देश को स्वतंत्र कराया बल्कि आज के आधुनिक भारत का निर्माण किया । 
संघ परिवार ने देश को बताना चाहिए की 1925 मे आरएसएस की स्थापना के बाद से 94 वर्षों मे आज तक संघ परिवार ने और संघ परिवार द्वारा समर्थित दल के प्रधानमंत्रियों और मुख्यमंत्रियों ने देश के लिए क्या किया ?
और नहीं किया तो क्यों नहीं किया?

संघ परिवार से हमारी विनती है की हमारे सारे महानायकों को कलंकित करने का जो घृणित कार्य लगातार कर रहा है उसे वह रोके और देश के उत्थान मे अपनी सकारात्मक भूमिका अदा करे ।
नमन  




Monday, 24 June 2019

मोहब्बत


मैंने
की है मोहब्बत
रंगीन तितलियों से
वे मंडराती हैं
फूलों और कलियों पर

मैंने
की है मोहब्बत
फूलों और कलियों से
वे मुस्करा देती हैं
मुझे देख कर
अपनी मोहक सुगंध से
मंहका देते हैं मेरी सांसें

मैंने
की है मोहब्बत
नदियों और झरनों से
उनकी लहरे उछलती हैं
मुझसे मिलने के लिए
और फिर इठलाकर
कल-कल करते हुए
पुकारती हैं मुझे
कहती हैं
आओ मुझमे समा जाओ

मैंने
की है मोहब्बत
वृक्षों से
वे झूम उठते हैं मुझे देख कर
छाया और शीतल बयार देते हैं मुझे
फल आने पर झुक जाती हैं
उनकी डालियाँ
मुझे देने के लिए फल


मैंने
की है मोहब्बत
खेतों और फसलों से
गेंहू और धान की लहलहाती बालियाँ
मटर लता के रंग बिरंगे फूल
सरसों के फूल से पीली हुई धरती
मक्के का जीरा और घूही
सुन्दरता से पाट देते हैं धरती को
समेट लेते हैं मेरा पूरा अस्तित्व
अपने अन्दर

मैंने
की है मोहब्बत
पत्थरों और पहाड़ों से
सर ऊँचा करके खड़ा हिमालय
विन्ध्य और सतपुड़ा की पहाड़ियां
देते हैं मुझे संबल और सीख
दुनियां के तमाम झंझावातों को
स्थिर होकर सहने की

कोई नहीं रोकता मुझे
प्यार करने से
परन्तु जब
मोहब्बत करता हूँ मैं
मनुष्य से
रोक दिया जाता है मुझे
जाती और धर्म के नाम पर
स्त्री और पुरुष के नाम पर
देश और भाषा के नाम पर

क्यों नहीं प्यार कर सकता मैं
सबसे एक साथ
एक ही समय

विनती है आपसे
मत रोकिये मुझे
मोहब्बत करने से
प्रेम करने से
गीत गाने से  ......

'नमन'

Tuesday, 11 June 2019

ईद



गरीबों
वंचितों
शोषितों
और कमज़ोरों के
लहू से 
तुम्हारे चेहरे का
रंग लाल है
तुम्हारे
झूठ और नफ़रत से
हर गली - हर शहर
हर गाँव लहुलूहान है
हर तरफ़ हो रही
बलात्कार और हत्याएँ
तुम्हारी हिंसक लपलपाती
ज़ुबान का कमाल है. 

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प्रेम ICU में है
मानवीय गुणों के
प्लेटलेट्स कम होने से
जगह जगह फट गई हैं
सामाजिक संरचना की नसें
खूब खून बहा है
मरने की कगार पर है वह
सुना है
सरकारी सहायता न मिलने से
हर जगह संवेदना नामक
अॉक्सीजन का अभाव है
दवा विशेषज्ञ
डॉ सेकुलर को हटा कर
सर्जन डॉ मस्कुलर की
नियुक्ति की गई है
मरीज़ की जान बचाने के लिए
मैं सुबह से
अपने मित्रों को
ईद मुबारक कहने की
कोशिश कर रहा हूँ
पर आवाज़
गले में फँस कर रह गयी है.
नमन

Tuesday, 4 June 2019

देश का बंटवारा और महात्मा गांधी




9 जनवरी, 1915 को गांधीजी जब अफ्रीका से हिन्दुस्तान वापस आये, तब कांग्रेस का नेतृत्व लोकमान्य तिलक कर रहे थे। गोपालकृष्ण गोखले की अस्वस्थता के कारण प्रगतिशील, सुधारवादी शक्तियां कमजोर पड रही थी। लोकमान्य और गोपालकृष्ण गोखले से मिलने के बाद महात्मा गांधी ने पहले पूरे हिंदुस्तान का दौरा किया और फिर भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन मे अपनी सहभागिता शुरू की। 

कांग्रेस ने महात्मा गांधी के नेतृत्व मे स्वतंत्र भारत के लिए कई आंदोलन चलाये। इन आंदोलनों की सफलता ने महात्मा गांधी को राष्ट्रपुरुष के रूप मे स्थापित कर दिया । एक तरफ जहां गांधी हिन्दू - मुस्लिम एकता की बात करते थे, सभी भारतीयों को साथ ले कर चलने की बात करते थे वहीं मुस्लिम लीग जिसे अंग्रेजों का परोक्ष और अपरोक्ष दोनों समर्थन प्राप्त था सिर्फ मुसलमानो के हितों की बात करता था।

1925 में राष्टींय स्वयंसेवक संघ की स्थापना हुयी । अंग्रेजों ने इस संगठन का उपयोग बड़ी चालाकी से देश में हिन्दू मुस्लिम विद्वेष कायम करने और कांग्रेस को कमजोर करने में किया। आरएसएस ने सिर्फ गांधीजी को तथा मुसलमानों को नीचा दिखाने का काम किया। इन्होंने आजादी के एक भी आन्दोलन में कभी परोक्ष या अपरोक्ष रूप से भाग नहीं लिया। उनको गांधीजी का नेतृत्व मान्य नहीं था।  गांधीजी तथा कांग्रेस से अलग, स्वतंत्र रूप से कोई एक भी आजादी का आन्दोलन भी इन लोगों ने नहीं चलाया। विराट आन्दोलन की तो बात ही क्या कहें, कोई छोटा से छोटा आन्दोलन भी चलाने की इन देशाभिमानियों ने कभी हिम्मत नहीं की। सावरकर के अलावा मातृभूमि के इन लाडलों में से किसी ने समाज-सुधार का काम भी नहीं किया।

1937 में हिन्दू महासभा के अहमदाबाद-अधिवेशन में सावरकर ने द्विराष्ट्रवाद के सिद्धान्त का समर्थन किया था। इस तरह अप्रत्यक्ष रूप से इन्होने मुस्लिम लीग ने अलग पाकिस्तान के लिए प्रस्ताव का समर्थन कियाउससे तीन वर्ष पूर्व ही सावरकर ने हिन्दू और मुसलमान, ये दो अलग-अलग राष्टींयताए हैं, यह प्रतिपादित करने की कोशिश की थी। सावरकर ने कहा था की यदि हिंदुस्तान आज़ाद होता है तो आज़ाद हिंदुस्तान में मुसलमानों को संपत्ति रखने और वोट देने का कोई अधिकार नहीं होगा।  

भारत-विभाजन के लिए जितने जिम्मेदार मुस्लिम लीग तथा अंग्रेज हैं, उतने ही ज़िम्मेदार सावरकर, आरएसएस और डॉ श्यामाप्रसाद मुखर्जी जैसे लोग भी हैं। आजाद भारत में हिन्दू ही हुकूमत करेंगे, ऐसा शोर मचाकर हिन्दुत्ववादियों ने विभाजनवादी मुसलमानों के लिए एक ठोस आधार दे दिया था।  मुहम्मद अली जिन्ना, हेडगेवार, गोलवलकर और श्यामाप्रसाद मुखर्जी आदि का उपयोग अंग्रेज़ चालाकीपूर्वक करते थे। गुरु गोलवलकर ने ऐडाल्फ हिटलर का अभिनन्दन किया, फिर भी अंग्रेजों ने उनको गिरफ्तार नहीं किया । गोलवलकर का उपयोग अंग्रेज गांधीजी के खिलाफ करते थे। 

उस समय की राष्ट्रीय राजनीति में यो लोग जयचन्द थे। जब दो साम्प्रदायिक ताकतें एक-दूसरे के खिलाफ काम करने लगती हैं, तब दोनों एक ही लक्ष्य की ओर अग्रसर होती हैं, और वह होता है आत्मविनाश का। हिन्दू सम्प्रदायवादियों ने ऐसा करके अंग्रेजों और भारत-विभाजन चाहने वाले मुसलमानों को फायदा ही पहु!चाया था। इन्होने 1942 की आजादी के आन्दोलन में कभी भाग नहीं लिया , उल्टे कई बार ब्रिटिश सरकार को पत्र लिखकर यह जानकारी भी दी थी कि हम आन्दोलन का समर्थन नहीं करते हैं।  

इन हिन्दूवादियों ने  विभाजन को रोकने के लिए क्या  किया ? सावरकर, हेडगेवार, गोलवलकर, गोडसे , डॉ श्यामाप्रसाद मुखर्जी ने विभाजन के विरुद्ध क्यों नहीं आमरण उपवास किया ? क्यों नहीं इसके लिए उन्होंने व्यापक आन्दोलन चलाया ? जिस महात्मा गांधी को गालियां देते हों, उसी से देश बचाने की गुहार भी लगाते हो ? और जब गांधीजी अकेले पड जाने के कारण देश का विभाजन रोक नहीं पाये, तब आप उनको राक्षस मानकर उनका वध करने की साजिश रचते हो ? इसको मर्दानगी कहेंगे या नपुंसकता ?

भारत का विभाजन गांधी के कारण नहीं हुआ है, इन लोगों के कारण हुआ है। गांधीजी ने तो अन्त तक भारत विभाजन का विरोध किया था। गांधीजी ने अन्तिम समय तक इसके लिए जिन्ना के साथ लगातार बात की, उन्हे मनाने का अनथक प्रयास किया । भारत पाकिस्तान विभाजन और बंटवारे के समय हुई लाखों हिन्दू -मुसलमान और सिख हत्याओं के लिए सावरकर, गोलवलकर, हेगडेवार और डॉ श्यामाप्रसाद मुखर्जी जैसे नेता ज़िम्मेदार थे।  

एक तरफ जब कांग्रेस पूरे देश में अंग्रेजों के खिलाफ 'भारत छोडो' आन्दोलन चला रही थी वहीँ दूसरी तरफ डॉ श्यामाप्रसाद मुखर्जी मोहम्मद अली जिन्ना के साथ बंगाल में सरकार चला रहे थे और जिन्ना की मुस्लिम लीग सरकार में मंत्री थे।  जिन्ना के साथ इनका याराना इतना गहरा था की डॉ मुखर्जी ने बंगाल में विभाजन के पक्ष में जनमत कराया ताकि बंगाल का धर्म के आधार पर विभाजन किया जा सके।  यही भविष्य में पूर्वी पाकिस्तान (अब बांग्लादेश) बनने का कारण बना. 

"रघुपति राघव राजा राम -पतित पावन सीताराम,  
ईश्वर अल्लाह तेरो नाम -सबको सम्मति दे भगवान"   
का भजन करने वाले गांधीजी सर्वसमावेशक उदार राष्ट्रवादी थे। उन्होंने समाज के सभी वर्गों और सब कौमों को अपनाया था, मात्र मुसलमानों को ही नहीं।

अँगरेज़ सिखों के लिए खालिस्तान और दलितों के लिए अलग राष्ट्र बनाने पर आमादा थे।  परन्तु महात्मा गाँधी ने डॉ बाबा साहेब आम्बेडकर को मनाया और देश का विभाजन रोका।  वहीँ पंडित नेहरु सिख नेताओ को मनाने में सफल रहे।  

प्रत्येक छोटी अस्मिता व्यापक राष्टींयता में मिल जाय, यह चाहते थे गांधीजी और कांग्रेस। उनमे यह दूरदृष्टि थी। महात्मा का यह वात्सल्य-भाव था सबके प्रति। बदनसीबी से तथाकथित क्षद्म हिन्दू राष्टंवादी अंग्रेजों की नज़र से देश को देखते थे और यह समझना ही नहीं चाहते थे और न आज समझना चाहते हैं

आप सबसे सिर्फ इतनी विनती- 
"अब न हिन्दू न मुसलमान की खातिर लड़िये
अगर लड़ना ही है तो इंसान की खातिर लड़िये।  
हिन्दुस्तान की खातिर लड़िये।  

नमन

सावरकर

अंग्रेजों को दसों
माफीनामा लिख कर
जेल से रिहा होने वाला
सावरकर....
अंग्रेजों की तनख्वाह पर
अपनी ज़िंदगी गुजरनेवाला
सावरकर...
भारत छोड़ो आंदोलन का
विरोध करने वाला
सावरकर...
धर्म के नाम पर
देश के विभाजन का जिम्मेदार
सावरकर ....
विभाजन के कारण
लाखों हिन्दू मुसलमानो
की हत्या का ज़िम्मेवार
सावरकर.....
महात्मा गांधी की
हत्या का आरोपी
सावरकर .....
उनका आराध्य है
जिनका असली चेहरा
कायर का है
कातिल का है
काला है ....

'नमन'

Friday, 31 May 2019


                                2019 के आम चुनाव मे भ्रष्टाचार और परिवारवाद की भूमिका 

आज की राजनीति में भ्रष्टाचार अब कोई मुद्दा नहीं है वरना आँध्र प्रदेश में जगनमोहन रेड्डी की इतनी बड़ी जीत नहीं हुई होती ।  राजनैतिक जीवन में भ्रष्टाचार अगर मुद्दा होता तो देश की जनता लोकपाल की नियुक्ति नहीं करने के लिए मोदी जी को नकार देती । 
मध्य प्रदेश का 'व्यापम घोटाला'  जिसमें 50 से ज्यादा जाने गई और बीजेपी के मंत्री जेल भी गए जनता की नज़र मे कोई मुद्दा नहीं है? पनामा और पैराडाइज पेपर में जिन लोगों के नाम हैं उन पर 5 वर्ष में मोदी जी ने कोई कार्रवाई नहीं की।  मोदी शासन मे घटालेबाज़ों और भ्रष्टाचारियों के खिलाफ कोई कार्यवाही नहीं की गई । 
सहारा, बिरला डायरी से लेकर येदुरप्पा डायरी तक में खुद प्रधानमंत्री के नाम है फिर कैसे कहा जाए कि प्रधानमंत्री भ्रष्टाचारी नहीं हैं । 
राजस्थान का खान घोटाला जिसमें कोर्ट ने वसुंधराराजे सिंधिया से पूछा था कि सब पहाड़ कहां गए बताइए से लेकर रमन सिंह का अनाज घोटाला, रेड्डी बंधुओं का खान घोटाला, मोदी जी का गुजरात गैस घोटाला और आनंदीबाई बेन जमीन घोटाला... घोटालेबाज मंत्रियों के नाम लेते लेते मैं थक जाऊंगा परंतु इन घोटालों के बावजूद जनता ने मोदी जी को वोट दिया । 
महालेखा परीक्षक से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक को पता है कि राफ़ेल ख़रीद में घोटाला हुआ है वरना लगभग ६५० करोड़ का राफ़ेल लगभग १६०० करोड़ में ख़रीदने का क्या औचित्य है। 
वहीं डॉ मनमोहन सिंह सरकार द्वारा भ्रष्टाचार मे जिन लोगों पर कार्यवाही हुयी थी मोदी शासन के 5 वर्षों मे उन 2जी और कोयला घोटाले के आरोपियों को अदालत और सीबीआई ने क्लीन चिट दे दी और साबित कर दिया की कोई घोटाला नहीं हुआ था । 
इन चुनावो मे परिवारवाद भी कोई मुद्दा नहीं बना वरना ओड़ीसा मे पटनायक, आंध्रप्रदेश मे जगनमोहन रेड्डी सत्ता मे नहीं आते। 2019 के आम चुनावों मे बिहार का पासवान परिवार, पंजाब का बादल परिवार, हिमांचल मे धूमिल परिवार, राजस्थान मे वसुंधरा राजे परिवार, महाराष्ट्र मे मुंडे -महाजन परिवार, विखे पाटिल परिवार, शिंदे परिवार, उत्तर प्रदेश मे मुलायम परिवार, मेनका गांधी परिवार आदि के लोग चुने गए। 
इन आम चुनावों मे अगर बेरोजगारी, किसानो की आत्महत्या, बलात्कार , बंद होते उद्योग धंधे, आर्थिक मंदी, नोट बंदी, बैंको का लगभग 12 लाख करोड़ का एनपीए, जीएसटी आदि कोई मुद्दा नहीं बना तो इसका श्रेय पूरी तरह से गोदी मीडिया को जाता है जो मानसिकरूप से पंगु हो गया है और सरकार का भाँट बन कर रह गया है। 
BJP , RSS , मीडिया, चुनाव आयोग, धन शक्ति और बाहुबल.... ने मिलकर इन चुनावों में कांग्रेस को हराया है ।  कांग्रेस संगठन और कांग्रेस नेताओं ने अपने नेता राहुल गांधी अगर 50 प्रतिशत भी साथ दिया होता तो कांग्रेस कम से कम 120 सीट जीतती । 
BJP और RSS ने बड़ी चालाकी से कांग्रेस को हिंदू विरोधी साबित कर दिया और यह प्रचार किया कि अगर कांग्रेस सत्ता में आती है तो न तो देश सुरक्षित रहेगा और न देश का हिंदू सुरक्षित रहेगा ।  लोगों मे असुरक्षा की भावना पैदा करके उन्हे डराया गया । देश की सुरक्षा और हिन्दुओं की सुरक्षा के डर से पिछड़ी जातियों और ग्रामीण जनता ने BJP वोट किया। 
देश की जनता में असुरक्षा की भावना निर्माण करने में BJP सफल रही और ऐसे में उन्हें मोदी जी एक मात्र नेता नज़र आए जो देश को सुरक्षित रख सकते हैं । मीडिया के द्वारा क्षद्म राष्ट्रवाद के प्रचार ने बीजेपी को इन चुनावों मे जीत दिलाई । 
अगर एक लाइन में कहें तो गोदी मीडिया, धन बल , सरकार बल, चुनाव आयोग बल आदि का उपयोग करके BJP ने इन चुनावों में अपने झूठ को सच साबित किया और उसी छल के बल पर चुनाव जीता.
'नमन' 

Saturday, 18 May 2019

देश के युवकों के नाम खुला पत्र,
आज भारत का नवयुवक जो कुछ भी भुगत रहा है उसके लिए वह खुद जिम्मेदार है.  आज के 5 साल पहले चले जाइए, लगभग सभी अच्छे इंजीनियरिंग और मैनेजमेंट कॉलेज एवं महाविद्यालयों में 80% से अधिक छात्रों का प्लेसमेंट उनकी अंतिम परीक्षा के पहले हो जाता था.
इंजीनियरिंग और मैनेजमेंट के बच्चों का छोड़िए अच्छे आर्ट्स के महाविद्यालयों तक के छात्रों का चयन कंपनियां कर लेती थी. परंतु हमारे देश के नौजवानों को नौकरी की जरूरत बिल्कुल नहीं थी, अतः उन्होंने छद्म राष्ट्रवाद के नाम पर एक ऐसे व्यक्ति के हाथ में देश की बागडोर दे दी जो यह कहता था कि पाकिस्तान को प्रेम पत्र लिखना बंद करिए मनमोहन सिंह जी.
हालांकि वह देश के पहले प्रधानमंत्री बने जिन्होंने अपने प्रधानमंत्री पद की शपथ पर पाकिस्तानी प्रधानमंत्री को बुला लिया, जिसे अभी कुछ महीने पहले तक पानी पी पीकर गाली देते थे .
अभी कल ही उन्होंने खुद भी पाकिस्तान को प्रेम पत्र लिखा है.
हमारे देश के नौजवानों ने एक ऐसे व्यक्ति को प्रधानमंत्री चुना जिसने उनसे वादा किया था कि वह देश को भ्रष्टाचार से मुक्त कर देगा. प्रधानमंत्री बनने के 4 वर्ष  6 महीने बाद तक उस व्यक्ति ने लोकपाल की नियुक्ति नहीं की.  उन्हे डर था कि अगर लोकपाल के नियुक्ति हुई थी उनका आधा मंत्रिमंडल जेल में होगा.

कांग्रेस ने 2G, कोयला आदि घोटालों में जितने लोगों को जेल भेजा था उन्हें पिछले 5 साल में बाइज्जत बरी कर दिया गया . मानो कोयला और 2जी घोटाला हुआ ही नहीं, और सबसे बड़ी बात यह रही की कोयला और 2जी घोटाले के आरोप कांग्रेस के जिन नेताओं पर लगे थे जिनमें से कोई भी इन 5 वर्षों में गिरफ्तार तक नहीं हुआ.
अब भ्रष्टाचार कोई मुद्दा नहीं है . हालांकि सहारा- बिरला डायरीओं में , येदयुरप्पा की डायरी में खुद प्रधानमंत्री के नाम मिले हैं.. राफेल डील का भ्रष्टाचार और आनंदीबेन की बेटी को दिए गए लगभग 425 एकड़ सरकारी जमीन में हुआ भ्रष्टाचार आदि की बात छोड़ दीजिए, उनकी जांच सीबीआई को नहीं सौंपी जाएगी ...
क्योंकि यह सारे आरोप खुद प्रधानमंत्री पर हैं.
कांग्रेस शासन में कोयला घोटाले में प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह पर आरोप लगे थे और प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने खुद वह मामला सीबीआई को सौंप दिया था और अपने खिलाफ जांच करवाई थी.
देश के नौजवानों ने एक ऐसे व्यक्ति को वोट दे दिया जिसने रात को 10 बजे बिना रिजर्व बैंक से पूछे यह कहते हुए नोटबंदी घोषित कर दी कि अगले 50 दिन में देश से आतंकवाद और नक्सलवाद का खात्मा हो जाएगा और देश से सारा काला धन खत्म हो जाएगा. हालत यह थी कि उन्हें यहां तक नहीं पता था कि नोटों के साइज बदल दिए गए हैं और एटीएम के बॉक्स के साइज नहीं बदले गए हैं .
उन्होंने देश के आर्थिक प्रबंधन को मजाक बनाकर रख दिया . नोट बंदी के पहले 50 दिन में 55 बार नियम बदले गए . उन्होंने यह भी कहा था कि अगर आतंकवाद और नकसलवाद का समूल  नाश नहीं हुआ तो आप मुझे चौराहे पर फांसी पर चढ़ा देना.
इस देश के नौजवान ने एक ऐसे व्यक्ति को प्रधानमंत्री बना दिया जिसमें देश के उद्योगों को खत्म कर दिया, जिसके कारण सरकारी बैंकों का एनपीए 11 लाख करोड़ के ऊपर पहुंच गया.. लाखों उद्योग बंद पड़ गए और उद्योग बंद पड़ने की वजह से नौजवानों की नौकरियां चली गई.
देश के नौजवानों ने एक ऐसे व्यक्ति को प्रधानमंत्री बना दिया जो जीएसटी, मनरेगा, आधार और एफडीआई आदि का पिछले 10 वर्षों से विरोध कर रहा था और देश की अर्थव्यवस्था में पलीता लगा रहा था. हालांकि वह आज उन्हीं सारी योजनाओं को लागू करने की क्रेडिट ले रहा है.
देश के नौजवान ने एक ऐसे व्यक्ति को वोट दे दिया जो सुरक्षा मामलों में भी सुबह से शाम तक झूठ बोलता है और छद्म राष्ट्रवाद की बात करता है. इसी छद्म राष्ट्रवाद के पीछे छिपकर वह देश को बर्बाद कर रहा है.

आज देश में औसतन 107 महिलाओं के साथ प्रतिदिन बलात्कार हो रहा है परंतु बेटी बचाओ का नारा देने वाला हुआ व्यक्ति महिलाओं की बात नहीं करता उल्टा उसकी पार्टी के नेता बलात्कारियों के पक्ष में मोर्चा निकालते देखे गए हैं और कई केंद्रीय मंत्री हत्यारों का स्वागत करने में अपने आप को धन्य समझते हैं.

देश के युवक फिर उसी छद्म राष्ट्रवादी को वोट करने जा रहे हैं,
अपनी बर्बादी को वोट देने जा रहे हैं...
देश के युवकों को बेरोजगारी मुबारक ! झूठ मुबारक !
देश की बर्बादी मुबारक!
'नमन'

Thursday, 16 May 2019

लाज



लाज 

लुट रही है लाज 
बहन बेटियों की
बाप के सामने 
एक पत्ता नहीं खडकता
कोई आवाज नहीं 
गूंगी बहरी दिल्ली
अब अंधी भी हो गई है
शहंशाह जोश में है
कलम- आवाज सब
सत्ता के पास गिरवी है
दु:शासन अट्टहास कर रहा है..        नमन


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प्रेम आ रहा था
उनकी राजनीति के आडे़
सो उन्होंने
बड़ी चालाकी से
पहले 
प्रेम को नाजायज ठहरा दिया
फिर कर दी गई
प्रेम की हत्या
पिछले दंगों में
उसके पिछले दंगों में
उसके भी पिछले दंगों में
पर यह बिरवा
फिर फिर उग आता है
मनुष्य के हृदय में...            नमन