Wednesday, 10 February 2016

मोहब्बतें

             मोहब्बतें 

गैरों के गम भी हम सीने से लगा लेते हैं
इस तरह खुद को मोहब्बत की सजा देते है।   

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शराब पीते तो तौहीने मोहब्बत होती
तुम्हारी मद भरी नजरों की शिकायत होती। 
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वो और हैं जो मोहब्बत का कत्ल करते हैं
हम जैसे लोग मोहब्बत के लिए मरते हैं।  
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यूँ तो चर्चित रहा हूँ हुश्न के गलियारों में
नाम तेरा नहीं है मगर तलबगारों मे।  

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तू मुस्कराते रहे सुर्ख गुलाबों की तरह,
तेरी खुश्बू से मंहकती रहें सांसें मेरीे। 

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तू अकेले में ही छुप छुप के मिला कर हमसे
लोग जलते हैं तेरी मेरी आशनाई से।  
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मैं कहीं भी रहूँ ए तेरे आस-पास होता है
न जाने क्यों ए दिल फिर भी उदास होता है। 
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बहुत ढूढा मगर वो दिल न मिला
हम जिस दिल से दिल लगा लेते।   
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सोचा न था की कोई पुकारेगा इस तरह 
चाहेगा, निबाहेगा, सराहेगा इस तरह।  
मेरे लिए जियेगा मुझी पर मरेगा वो
मुझ पर वो अपनी जान लुटायेगा इस तरह।  

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उससे जरा सी बात पर तकरार हो गई,
इश्क की संकरी गली में रार हो गई।  
उसने कहा था साथ निभाउंगी उम्र भर
पर गैर के गले का वो हार हो गई।  

'नमन'

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