Monday, 11 January 2016

ख्वाबों का टूटा महल

    ख्वाबों का टूटा महल

ख्वाबों का टूटा महल लिख रहा हूँ
तेरी याद में इक गजल लिख रहा हूँ.
बहा है मेरी आँखों से जो बरसों
तेरी आँख का वही जल लिख रहा हूँ.
वो तन्हाईयाँ और तेरी इबादत
मोहब्बत का एक एक पल लिख रहा हूँ.
मेरी चाहतों की अबूझी कहानी
दिल कैसे हुआ है कत्ल लिख रहा हूँ.
बहुत कुछ है खोया तुझे चाहने में
कहानी वही आज कल लिख रहा हूँ.
परी तो नहीं हो न हो हूर कोई
मैं फिर भी तुम्हे अपना कल लिख रहा हूँ.
नमन

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