Tuesday, 13 October 2015

बीजेपी और संघ का पाकिस्तान प्रेम

                                         बीजेपी और संघ का पाकिस्तान प्रेम

पाकिस्तान के भूतपूर्व और अभूतपूर्व विदेश मंत्री खुर्शीद महमूद कसूरी की पुस्तक NEITHER A HAWK NOR DOVE का लोकार्पण आज मुंबई के नेहरु सेंटर में हुआ.

मुंबई में हुए इस लोकार्पण ने एक बार फिर आरएसएस और बीजेपी नेताओं का पाकिस्तान प्रेम सामने आ गया. कभी अडवानी जी का जिन्ना की मज़ार पर माथा टेक कर उन्हें सेक्युलर कहना, कभी जसवंत सिंह जी का पाकिस्तान प्रेम, कभी बाजपेयी जी की लाहौर यात्रा और पाकिस्तान के सामने घुटने टेकना जिसकी परिणति कारगिल की घुसपैठ में हुयी, उसके पहले  १९७७ में बाजपेयी जी के विदेश मंत्री काल में भारत सरकार द्वारा ‘रॉ’ की वह स्पेशल विंग बंद कर देना जो पाकिस्तान के खिलाफ कार्यवाही करती थी, मोदी जी का अपनी ताजपोशी में नवाज़ शरीफ को आमंत्रित करना और शाल –साडी, मिठाई – बिरयानी की राजनीति करना आदि ऐसे अनेक उदाहरण हैं जो बीजेपी नेताओं का पकिस्तान प्रेम दिखाते हैं.

इसी की अगली कड़ी है बाजपेयी और आडवानी के खासमखास रहे, संघ के समर्पित कार्यकर्ता सुधीन्द्र कुलकर्णीजी का कसूरी जैसे कसूरवार को अपनी किताब के लोकार्पण के लिए मुंबई बुलाना. कसूरी और ISI के नजदीकी रिश्तों के बारे में सब जानते हैं. ISI समर्थित पाकिस्तानी आतंकवादी गुटों ने मुंबई पर कितने हमले किये, कितने बम ब्लास्ट किये ये सुधीन्द्र कुलकर्णी को बताने की जरूरत नहीं है. पर उन्होंने कसूरी जैसी विवादित पृष्ठभूमि वाले व्यक्ति को मुंबई में आमंत्रित कर हमारे ज़ख्मों पर नमक छिड़का.

सुधीन्द्रजी के साथ शिव सैनिकों ने जो दुर्व्यवहार किया उसकी संस्तुति नहीं की जा सकती और मैं उसकी भर्त्सना करता हूँ, पर सुधीन्द्र जी जैसे लोग हमारे जैसे आम मुंबईकर/ आम भारतीय की भावनाओं से खेलने का जो काम करते रहे हैं वह बंद होना चाहिए.

मनमोहन सिंह के प्रधानमंत्री काल में जब कुछ पत्रकार नवाज़ शरीफ के निमंत्रण पर विदेश में उनसे मिलने चले जाते हैं तब ‘कौन सी मिठाई लेने गए थे?’ जैसा प्रश्न उठाते हुए भारतीय पत्रकारों पर सीधे सीधे घूस लेने का आरोप लगाने वाले मोदी जी जब अपनी ताजपोशी में खुद नवाज़ शरीफ को आमंत्रित करते हैं तब नवाज़ शरीफ और मोदीजी के सम्बन्ध कितने नजदीकी हैं इसका पता हमें चलता है.

यह बीजेपी और संघ का दूसरा चेहरा है. इसके कारण देश का कितना नुकसान हुआ है यह किसी को याद करने की जरुरत नहीं है. बाजपेयी के प्रधानमंत्री काल में संसद पर आतंकी हमला हो या मोदी जी के मुख्यमंत्री काल में गांधीनगर के अक्षरधाम मंदिर पर हुआ आतंकी हमला जिसमे दर्जनों जाने गयी और सैकड़ों घायल हुए थे, या मुंबई पर हुए आतंकी हमले जिसमे सैकड़ों जाने गयी ऐसे घाव हैं जो अभी तक भरे नहीं हैं. फिर भी हम पाकिस्तानियों की इज्ज़त आफजाई में झुके चले जा रहे हैं.

संघ और बीजेपी नेताओं को अपना कायरता पूर्ण व्यवहार बंद कर सच्चे भारतीय की तरह व्यवहार करना चाहिए वरना लोग तो यही कहेंगे की इन डपोरशंखो की कथनी करनी में ज़मीन आसमान का अंतर है.

नमन 

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