Tuesday, 13 September 2011

IBADAT




न अपनी बात कहूँ,  न किसी की बात कहूँ 
मैं मुलाजिम हूँ उसका, बस उसी की बात कहूँ|

लोग कहते हैं शेर, मैं तो शेर पढ़ता हूँ
मैं मोहर्रिर हूँ जिसका, बस उसी की बात कहूँ|

वो मुझको रोटी और साँसें मुहैया करता है
ये मुनासिब है की मैं सिर्फ उसकी बात कहूँ|

मेरा साहब मुझे हर रोज कुछ सुनाता है
उसी की बात सुनू और उसी की बात कहूँ|

मेरी सुबहें बनारस और मेरी शामें अवध
दुवा है उसकी, मैं उसीसे  उसकी  बात कहूँ|  'नमन'    



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