Monday, 5 September 2016

अच्छी औरतें


अच्छी औरते
घर में रहती हैं
कभी घूंघट
कभी परदे
तो कभी बुरके में 
छिपी होती हैं....
बुरी औरते
खुले आम
पुरुष के कंधे से कंधा मिला कर
नौकरियां करती हैं
सीमा पर लड़ती हैं
ऑटो, टैक्सी और ट्रेन
चलाती हैं
हवाई जहाज़ उडाती हैं
कंपनिया और बैंक चलाती हैं...
सबसे बुरी औरते
वे होती हैं
जो राजनीती में जाती हैं
अवाम के लिए लड़ती हैं
अन्याय के खिलाफ
आवाज़ उठाती हैं
वे कुलटा और छिनाल कहलाती हैं....
मित्रों
औरते बुरी नहीं हैं
बुरी है हमारी दृष्टि
जब हम अपनी दृष्टि बदल लेंगे
तब औरतों को
घूंघट , परदे या बुरके की
जरूरत नहीं होगी
जरूरत नहीं होगी.... नमन

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