Monday, 8 August 2016

हंगामा है क्यों बरपा....

हंगामा है क्यों बरपा....
मोदीजी के प्रधानमंत्री बनते ही उनके और बाबा रामदेव के खासमखास आदरणीय वेदप्रताप वैदिक जी लपक कर पाकिस्तान पहुंचे और आतंकवादियों के सरगना हाफ़िज़ सईद मिल आये. हाफ़िज़ सईद की तलाश भारत की सारी जासूसी एजेंसियां कर रही थी पर वे उन्हें सूंघ तक नहीं पाई और वैदिक जी उन्हें मिल आये. साथ बैठ कर दावत उड़ा आये.
अब बिना पासपोर्ट वीसा के तो ‘वैदिक’ जी पाकिस्तान गए नहीं होंगे, सो भारत सरकार को पता था की ‘वैदिक’ जी किस काम से पाकिस्तान जा रहे हैं. वीसा के एप्लीकेशन में यह भी दर्ज होता है की आपको देश में कहाँ और किस शहर में जाना है सो सरकार और ‘वैदिक’ जी दोनों जानते थे की हाफ़िज़ सईद कहाँ मुकाम कर रहे हैं. कुछ ढंका तुपा नहीं था खैर वैदिक जी गए...
पाकी पत्रकार इफ्तिखार शिराज़ी ने कहा- वेदप्रताप वैदिक और आतंकी हाफिज सईद की मुलाकात के बारे में भारत सरकार जानती थी.
वेद प्रताप वैदिक, मोदीजी और बाबा रामदेव के लंगोटिया यार हैं. सो उनको विशेषाधिकार प्राप्त हैं की भारतीय सुरक्षा और विदेशनीति का तीया -पांचा जब चाहे बेधड़क कर सकते हैं.
मोदी जी भारत के प्रधान मंत्री है उनका रिमोट रामदेव जी के पास है. वैदिक जी दोनों के अन्तरंग हैं , सो सरकारी सन्देश लेकर ही हाफिज सईद से मिले होंगे ???
सुलह सपाट की ही बात होगी, कोई ललकारने तो गए नहीं थे वैदिक साहब ?
नवाज शरीफ के सामने नतमस्तक होने के बाद अगर थोडा सा हाफ़िज़ सईद के गले मिल लिए तो इतनी हाय तोबा क्यों ?
यह भी हुआ हो सकता है की जब वैदिक साहब नवाज़ शरीफ बदमाश से मिले तो नवाज़ भाई उनसे इतना प्रभावित हुए की उन्होंने समझ लिया की यह आदमी हाफिज सईद के स्तर का है सो दोनों की मुलाकात तय करवा दी.
अब पकिस्तान भारत के द्विपक्षीय सम्बन्ध तो पिछले २ दशक से पाकिस्तानी आतंकी ही तय करते रहे हैं. पाक सरकार तो मूक द्रष्टा है.सो जैसा की अधिकांश भारतीय पत्रकारों का मानना है की वैदिक जी भारत पाक रिश्तों में शिमला समझौते से लेकर काश्मीर मुद्दे पर द्विपक्षीय वार्ता के लिए हाफ़िज़ सईद से मिल लिए.
वैदिक जी के कारनामे पर मोदी जी इन दिनों गुनगुना रहे है...
हंगामा है क्यों बरपा , मुलाकात ही तो की हैं...
कश्मीर पर चर्चा की... दिल्ली अभी बाकी है...
पिछली बार का ही देखिये , अटल जी लाहौर में नवाज़ को शरीफ समझ कर उनके सामने घुटने टेके बैठे थे और पाक आतंकवादियों के निर्देश पर पाकिस्तानी फौज ने कारगिल पर कब्ज़ा कर लिया. बाजपेयी जी ने कई दिनों तक वीर रस की कई कई कवितायेँ पढ़ी,
'हार नहीं मानूंगा ...रार नहीं ठानूंगा वगैरह वगैरह
पर पाक फ़ौज कविता सुनाने के मूड में नहीं थी सो हज़ारो भारतीय सैनिकों की बलि चढ़ा दी बाजपेयी जी की नासमझी और अदूरदर्शिता ने.
वेदप्रताप वैदिक जी ने सही समझा की आरएसएस वालों की तरह आतंकी भी तो आदमी ही है. अगर उससे धीरे से पूँछ ही लिया की भाई अगला हमला कब, कहाँ, कितने फिदायीनों द्वारा होगा तो क्या बुरा किया वैदिक जी ने ?
पिछले दो सालों में जब से आदरणीय वेदप्रताप ‘वैदिक’ जी हाफ़िज़ सईद से मिल कर आये हैं भारत , विशेषकर कश्मीर में आतंकवादी गतिविधियाँ बढ़ गयी हैं. २००४ से २०१४ तक यहाँ वहां छिपने वाला कायर आतंकी हाफिज सईद अब खुल कर सामने आ गया है.
राजनाथ जी के दक्षेस सम्मलेन में जाने की जैसे ही घोषणा हुयी, हाफ़िज़ मियां ने ललकार कर पाक सरकार को चुनौती दी की पाक की नापाक धरती पर राजनाथ सिंह को कदम नहीं रखने दिया जाए. खैर राजनाथ जी राजपूत हैं नहीं डरे और हनुमान चालीसा जपते हुए पाकिस्तान पहुँच गए.
वहां हाफिज मियां के डर से न तो कोई पाकिस्तानी मंत्री उन्हें एअरपोर्ट पर मिलने आया, न राजनाथ जी का भाषण किसी को सुनने दिया गया, न उनके साथ बिरयानी खाने को कोई तैयार हुआ. सो बेचारे राजनाथ जी बिना बिरयानी खाए, अपने मुंह की खाकर दिल्ली लौट आये और अपना रोना पूरी संसद को सुनाया.
आज कल बहस इस बात की हो रही है की नाक किसकी कटी ?
आगे से रॉ, आई बी जैसे संगठनो की जरुरत नहीं है. नाग पुर से ट्रेनिंग लिए हुए वैदिक जी जैसे कुछ लोग सब संभाल लेंगे.? अब कुछ लोगों की अक्ल पर पाकिस्तानी पत्थर पड गएँ हैं जो चिल्ला रहे हैं.
मैं तो वैदिक जी जैसी परम मूर्ति को कोटि कोटि नमन करता हूँ. सुना है वैदिक जी पिछले कई प्रधानमंत्रियों के कार्यकाल में वे पीएमओ में बैठे ताश के पत्ते की बाज़ी खेला करते थे.
हम साले दूसरे तीसरे चौथे दर्जे के नागरिक जो पूरी ज़िन्दगी पीएमओ में घुस तक नहीं पाए वैदिक जी की आध्यात्मिक उंचाईयों को सूंघने में भी असमर्थ हैं. सो ऊंघ रहे हैं. वैदिक जी के बारे में सोच कर ..... भर आया है. अत: आज बस इतना ही...
'नमन'

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