Saturday, 30 July 2016

सैयां भये कोतवाल

                                                              सैंया भये कोतवाल 

शायद आप इससे सहमत न हो, पर जो मुझे दिखाई दे रहा है, समझ में आ रहा है, महसूस हो रहा है वह यह है की आज देश बड़े ही कठिन दौर से गुज़र रहा है.
सरकार घृणा के साथ है. द्वेष के साथ है. अज्ञान के साथ है. वैर फ़ैलाने वालों के साथ है. भ्रम फ़ैलाने वालों के साथ है. हिंसा के साथ है और सबसे बुरी बात है की झूठ के साथ है. 
मानवीय मूल्य लोप हो गए हैं. इंसान का दर्शन दूभर हो गया है. देश में एक भारतीय ढूंढे नहीं पाएंगे आप. अच्छे इंसान कहीं किसी कोने में दुबके पड़े मिलेंगे आपको. 
कमज़ोर होना हमेशा से अभिशाप था, पर अब वह पाप हो गया है.
शासकों के अनुसार देश का व्यापारी, सैनिकों से ज्यादा खतरा उठाता है.
देश बीफ के एक्सपोर्ट में न १ हैं, पर किसी के फ्रिज में बीफ होने की आशंका मात्र से उसकी हत्या कर दी जा रही है. किसी महिला के थैले में बीफ होने की आशंका मात्र से उन्हें बेरहमी से पीट दिया जा रहा है.
आरक्षण की मांग करने वाला देशद्रोही कह कर जेल में ठूंस दिया जा रहा है.
अपने हक की मांग करने वाले विद्यार्थी को आत्महत्या पर मजबूर किया जा रहा है.
विश्वविद्यालय परिसर में हो रहे सही या गलत कामों के लिए वीसी को ज़िम्मेदार न ठहरा कर छात्र संघ के नेता को उसका ज़िम्मेदार बताया जाता है.
सत्ता पक्ष के विधायक कैमरे के सामने लोगों को दौड़ा कर पीटते हैं और जान से मारने की धमकी देता है उस पर कोई कार्यवाही नहीं होती. वहीँ मामूली शिकायतों पर विधायकों को जेल में ठूंसा जा रहा है.
एक विश्वविद्यालय की छात्र संघ की नेता को सिर्फ इसलिए परेशान किया जाता है की वह लड़की है.
सत्ता में बैठे लोगों द्वारा एक पूर्व मुख्यमंत्री को वैश्या कहा जा रहा है.
देश की सबसे पुरानी पार्टी की मुखिया की बेटी को सडकों पर बैनर लगा कर गालियाँ दी जा रही हैं.
पुलिस खुद बेकसूर दलितों को पकड़ कर राष्ट्रवादी गुंडों के हवाले कर देती है ताकि उन्हें बेरहमी से पीटा जा सके.
प्रेमी युगलों को सड़कों पर पीटा जा रहा है।
दंगे करवाने वाले विधायकों और सांसदों के सार्वजनिक अभिनन्दन समारोह हो रहे हैं.
बहन बेटियों के सामूहिक बलात्कार पर चुप रहने की बात की जा रही है. केन्द्रीय मंत्री कह रहे हैं की बलात्कारों पर संसद में चर्चा होने से देश में होने वाले पर्यटन को नुकसान पहुंचेगा, विदेशी सैलानी कम आयेंगे.
वीरता पर पुरस्कार स्वरुप दी गयी ज़मीन सैनिकों से वापस ली जा रही है.
कायरता का प्रलाप ज़ारी है...
ज़ारी है अराजक तत्वों का नंगा नाच...
रेडिओ पर बज रहा है...
" सैयां भये कोतवाल - अब डर काहू का"


'नमन'

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