Sunday, 20 February 2011

आशिकी

मित्रों,
इश्क, प्यार, मोहब्बत, अपनापन, चाहत, स्नेह ये कोमल भावनाएं हमें बेहतर मनुष्य बनाती हैं, या कहें तो इश्वर के ज्यादा करीब ले जाती हैं| इन्ही कोमल भावनाओं को शब्द देकर कवि एक सपनों की दुनियां रचताहै| मैं भी ऐसी ही जमात का आदमी हूँ , सो लिखता रहता हूँ....

कैसे तुम्हे बताएं  साथी,   जीवन   का    इतिहास
हम तो सिर्फ मोहब्बत बूझें बुझी न जिसकी प्यास||

जग में फिरता मारा मारा लेकर मन में आस
कभी तो मेरा यार मिलेगा है मन में विश्वास||

गंगा  जैसे  पावन आंसू, मन  करे  काशी  वास
स्वर्ग रचाते वसुंधरा पर यदि होता  तू पास||
                                                                  'नमन'  


2 comments:

  1. सच्चे और बहुत अच्छे भाव - अति सुंदर

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