Sunday, 9 October 2016

ऐ सियासत मुझको तुझसे दुश्मनी भारी पड़ी / मेरे हर एक सच को तूने झूठ साबित कर दिया. नमन


ऐ सियासत मुझको तुझसे दुश्मनी भारी पड़ी
मेरे हर एक सच को तूने झूठ साबित कर दिया. नमन


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जुबानी 
जमा खर्च जारी है
युद्ध सीमा पर नहीं
टीवी स्टूडियो में
लड़ा जा रहा है
हो रही है
गोलाबारी
तू- तू , मै- मै
और
बोल बचन की
पाकिस्तान को हराने की
पूरी तैयारी है।
गाल बज रहे हैं
आस्तीने उपर हैं
टीवी एंकर बोलते हुए
हांफ रहे हैं।
हर पल
बांटे जा जा रहे हैं
सर्टिफिकेट
देशभक्त और
देशद्रोही होने के।           

                                   नमन


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नजर का वार और मनुहार मुस्कराहट की
वो शख्श प्यार का व्यापार किए जाता है।  नमन


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उन्हे शौक है अपने हुश्न की नुमाईश का
हमारा शौक है दिलों की आजमाईश का।  नमन


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इश्क की बाजी में अपनी हर कदम पर जीत है
या तो वो बाहों में है या फिर मन का मीत है।   नमन

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इश्क में दर्द भी होता है दिल भी जलता है
ये नशा सिर्फ और सिर्फ आशिकी में मिलता है।   नमन


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अच्छा था की बचपन में मुझे भान नहीं था
मैं ओम नहीं था और वो रहमान नहीं था।  
हमको नहीं पता था की नफरत है क्या बला
मेरे गाँव में कोई शहर का विद्वान नहीं था। 
 मेरी बस्ती में कोई भी परेशान नहीं था
क्योंकि वहां कोई हिन्दू मुसलमान नहीं था।  नमन

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चलो कुछ बेवकूफियाँ कर लें
अपने कातिल को बाँहों में भर लें। नमन

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हमने आईना दिखाया जिसको
अपना दुश्मन ही बनाया उसको।
झूठ - फरेब की इस दुनियाँ में
सच कब,कहाँ,रास आया किसको? नमन 

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