Friday, 17 July 2015


--- नकलची हैं संघ और बीजेपी --
मोदी जी और बीजेपी की नकलची प्रवृत्ति को देखते हुए आज सुबह सुबह एक पुरानी कहावत याद आ रही थी—
लीक लीक गाडी चले- लीकै चले कपूत
लीक छोड़ तीनो चलें घोडा, शेर, सपूत.
आज देश में संघ के रिमोट से संचालित मोदी जी की सरकार है. मोदी जी काशी को क्योटो बनाने पर तुले हैं. भारत को चीन बनाने पर तुले हैं. कुछ लोग मुंबई को हांगकांग बनाने की बात कर रहे हैं. मोदी जी ‘मेक इन इंडिया’ का शेर वाला लोगो तक स्विट्ज़रलैंड से चुरा लाये हैं.
यह बतलाता है की संघ और मोदी सरकार बौद्धिक दिवालियेपन का शिकार है. इनके पास अपनी कोई सोच नहीं है. दूसरों की अंधी नक़ल करते हुए संघ और मोदी जी के मुंह से भारत के आध्यात्मिक गुरु होने, विश्व गुरु होने, सबसे प्राचीन उन्नत संस्कृति होने की बात अच्छी नहीं लगती. जिनके पास अपना ज्ञान और दूरदृष्टि नहीं होती वही दूसरों की नक़ल करते हैं. 
आईये हम चीन से अपनी तुलना करे---
# चीन के पास भारत की तुलना में लगभग ४ गुना ज्यादा प्राकृतिक  संसाधन हैं और उसकी आबादी भारत से सिर्फ १०-१२ करोड़ ज्यादा है.
# यह इसलिए संभव हुआ की जब १९७२ से १९७७ के काल में भारत सरकार परिवार नियोजन, लाल तिकोन और ‘बस दो या तीन बच्चे- होते हैं घर में अच्छे’ का नारा दे रही थी तब ‘संघ’ और तत्कालीन ‘जनसंघ’ जो अब बीजेपी हो चुका है पूरे भारत में सरकार की परिवार नियोजन पॉलिसी के खिलाफ सुनुयोजित ढंग से अफवाह फैला रहे थे और दुष्प्रचार कर रहे थे. १९७७ में जनता पार्टी की सरकार आने पर यह कार्यक्रम लगभग बंद कर दिया गया.
फलस्वरूप जहाँ चीन ने सिर्फ एक या दो बच्चे की बात करके अपने देश में हो रहे जनसंख्या विस्फोट को रोक लिया वहीँ भारत की जनसँख्या बड़ी तेज़ी से बढ़ी. ७० के दशक का परिवार नियोजन कार्यक्रम अगर सफल हो गया होता तो आज भारत की जनसँख्या १०० करोड़ से कम होती. अगर ऐसा होता तो आज सबके पास नौकरी होती, सबके पास अपना घर होता, हम चीन से ज्यादा विकसित देश होते. संघ और जनसंघ के तत्कालीन नेताओं की अज्ञानता की वजह से भारत चीन से पिछड़ गया.
# १९८५-८६ में जब राजीव गाँधी देश में कंप्यूटर क्रांति की बात कर रहे थे तब ‘संघ’ दुष्प्रचार कर रहा था की कंप्यूटर आने से एक कंप्यूटर सैकड़ों आदमी के काम करेगा और देश के नव जवानों को नौकरियां नहीं मिलेंगी. कंप्यूटर के विरोध में अटल बिहारी बाजपेयी और अडवानी जी संसद पर बैलगाड़ी मोर्चा लेकर आये थे.
इसका फल यह हुआ की कंप्यूटर हार्डवेयर मैन्युफैक्चरिंग के क्षेत्र में हम चीन हमसे मीलों आगे निकल गया और हम उससे १५ साल पिछड़ गए.
# ऐसे ही १९८७ आस पास जब राजीव गाँधी ‘सैम पित्रोदा’ को विदेश से भारत लाये और उन्होंने सन २००० तक भारत के हर गांव तक टेलीफोन पंहुचाने की बात की तो ‘संघ’ और बीजेपी नेताओं ने उनका मज़ाक उड़ाया. हर कदम पर उसमे टांग अडाई गयी. आज गांव तो छोडिये ९० करोड़ भारतियों के पास फोन है. अगर इस क्षेत्र में भी राजीव गाँधी को बीजेपी और संघ का विरोध न झेलना पडा होता तो हम चीन से मीलों आगे होते.
# राजीव गाँधी के समय की बात छोड़े तो अभी १० साल पहले मनमोहन सिंह की FDI, CST का विरोध करने वाली बीजेपी और संघ आज उन्ही के कार्यान्वयन में जुटे हैं.
# २००५ में जब मनमोहन सिंह ने कोयला खानों की नीलामी करने की बात की तो सभी बीजेपी शासित राज्यों के मुख्यमंत्रियों ने उनका विरोध किया और कहा की खनिज राज्य की संपत्ति हैं. अंत में उन्ही मुख्यमंत्रियों के सुझाव पर जो कोयला खान आबंटित हुयी उसमे भ्रष्टाचार का आरोप बीजेपी ने मनमोहन सिंह सरकार पर लगाया. अगर २००५ में ही नीलामी के द्वारा कोयला खानों का आबंटन हुआ होता तो आज ये नौबत न आती और न कोयले की कमी की वजह से लाखों करोड़ का कोयला विदेशों से मंगाना पड़ता.
###  संघ और बीजेपी के बारे में अब लोगों की राय बन रही है की ये slow हैं. इन्हें सही बात १० से १५ बरस बाद समझ में आती है.... अतः दूसरे देशों के अंधे अनुकरण पर लगे हुए हैं. जो देश दूसरों की नक़ल करता है वह हमेशा पीछे रहता है. भारत के प्राकृतिक संसाधन, मानव संसाधन, उसकी अपनी भौगोलिक, सामाजिक परस्थितियों को देखते हुए हमें अपने आर्थिक उत्थान के प्रयत्न करने चाहिए न की किसी और की नक़ल करके.
ईश्वर बीजेपी और संघ के नेताओं को सद्बुद्धि दे की वे देश के उत्थान के लिए सही दिशा में प्रयत्न करें....

नमन 

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