Tuesday, 21 December 2021

 हिंदू और हिंदुत्व 

“धरम न दूसर सत्य समाना” 

और 

“परहित सरिस धरम नहिं भाई 

पर पीड़ा सम नहिं अधमाई” 

का ज्ञान  देने वाले भगवान राम हिंदू धर्म के अधिष्ठाता हैं। राम हिन्दू धर्म के प्राण हैं। उनके द्वारा कहा गया एक एक शब्द ही हिन्दू  धर्म है ।

इंसान रहे न रहे उसकी आवाज़ को ज़िंदा रखना होगा। यही आवाज़ आज कीनींव पर कल का निर्माण करती है।

यही आवाज़, यही जीवन दर्शन,यही विचार, यही आचरण देश और समाज की नींव का पत्थर हैं।

"हे ईश्वर इन्हें माफ़ कर देना क्योंकि ये नहीं जानते कि यह क्या कर रहे हैं" कहते हुए सूली चढता हुआ ईसा मसीह...

"तीर से घायल पक्षी को बचाते हुए सिद्धार्थ"...

गोडसे की गोली लगने पर "हे राम" कहते हुए प्राण त्यागने वाले महात्मा गांधी...

"किसी ज़रूरतमंद की सेवा में उठाया गया एक हाथ, ईश्वर की पूजा में उठाएगए दोनों हाथों से अधिक पवित्र  और महान है"; कहने वाले स्वामी विवेकानंद।

"पोथी पढ़ि पढ़ि जग मुआ पंडित भया न कोय

ढाई आखर प्रेम का पढ़े सो पंडित होय।"  कहने वाला कबीर।

 

"नाहक़ ही तेरे दिल में भटकाव पड़ गया

काबे में जो है शेख वही बुतकदे में है"  कहने वाला बहादुरशाह जफर;

पक्षियों को अपने खेत का अनाज चुनने से न रोकने वाले गुरु नानक।

ए सबके सब हमें "सेवा और प्रेम" का मंत्र दे गए हैं।

क्योंकि ये सब जानते थे कि; "एको अहम्- द्वितीयो नास्ति"

कहने वाला ईश्वर ही कण कण में विद्यमान् है और यही हिन्दू धर्म का मूल मंत्र है.....


हिन्दू  धर्म  कहता है कि इंसान, प्रकृति और प्रकृति जन्य तमाम वस्तुओं से जो निष्कामभाव से प्रेम करता है 

वह ईश्वर को प्रिय होता है।

आरएसएस का हिंदुत्व वसुधैव कुटुम्बकम को नहीं मानता , वह इंसान इंसान में भेद करता है, अपने पराये की बात करता है, धर्म और जाति के नाम पर लोगों को बांटता है......


नमन

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